बिहार की विधवा महिलाएं अब सीधे नहीं बेच सकेंगी प्रॉपर्टी, चाहे किसी भी जाति-धर्म की हों

बिहार की विधवा महिलाएं अब अपनी संपत्ति सीधे नहीं बेच पाएंगी. इसके लिए अब उन्हें अपने इलाके के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) से अनुमति लेनी होगी. विधवा महिलाओं की अर्जी पर इलाके के SDM लिखित में यह सत्यापित करेंगे कि यह संपत्ति किसी दबाव में नहीं बेची जा रही है. SDM को भी इन अर्जियों को तीन दिन में सत्यापित करना होगा. बिहार सरकार ने नए नियम की जानकारी सभी जिलाधिकारियों, जिला रजिस्ट्रार और उनके कार्यालयों को भेज दिया है.

अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ ने प्रोहिबिशन, एक्साइज और रजिस्ट्रेशन विभाग के DIG अयाज़ अहमद खान के हवाले से कहा है कि इस नए सिस्टम को सुप्रीम कोर्ट की एक कमिटी के निर्देशों के तहत बनाया गया है. यह निर्देश सभी जाति और धर्म की विधवा महिलाओं पर समान रूप से लागू होगा.

इस बारे में सासाराम के SDM राज कुमार गुप्ता ने बताया है कि उन्हें ये निर्देश मिल गए हैं. उन्होंने बताया कि इस संबंध में विधवा को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) देने के लिए एक फॉर्मेट बनाया गया है. हाल में सासाराम में ही रजिस्ट्री ऑफिस ने SDM की NOC न होने की वजह से तीन महिलाओं की रिलीज़ डीड को रिजेक्ट कर दिया था.

क्या है मामला?

बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में साल 2014 के अगस्त माह में एक PIL दाखिल हुई थी. इसपर कोर्ट ने छह सदस्यों की कमिटी बनाई थी. इस कमिटी को देश की विधवा महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक एक्शन प्लान बनाने को कहा गया था. इस कमिटी ने बीते साल 2017 की ही अगस्त माह में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी.

मिली जानकारी के अनुसार इसी कमिटी ने अपनी सिफारिशों में कुछ नए निर्देश दिए थे. इनमें यह भी था कि विधवा महिलाओं की संपत्ति के ट्रांसफर के लिए स्थानीय SDM का NOC को अनिवार्य कर दिया जाए.

Input : Live Cities

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