समीर कुमार को हेलमेट वाले हमलावर से था खतरे का आभास

EX Mayor Samir Kumar

मित्रों,
सवाल उठ रहा है कि हेलमेट पहनकर पूर्व मेयर समीर कुमार पर एके-47 से गोलियों की बौछार करने वाले शूटर की पहचान किसने की। पुलिस ने अधिकृत रूप से शूटर का नाम नहीं लिया परन्तु कुछ खास लोग शूटर की बाइक पर आगे बैठे चालक की नाक के बगल में मस्सा तक देखने का दावा कर रहे हैं। कौन हैं ये दावेदार? कहीं मास्टर माइंड अपने मीडिया मित्रों के माध्यम से जानबूझकर भ्रामक कहानी तो नहीं फैला रहे हैं? हमें यह भी देखना चाहिए कि मास्टर माइंड/सेटर अपनी पहचान छिपाने के लिए नाटक तो नहीं रच रहे हैं? सिंडिकेट सदस्यों, प्रोपर्टी डीलर और एके-47 रखने वाले गैंगस्टर का लोकेशन क्या है? कुछ खास वारदातों में जिस-जिस एके-47 से गोलियां बरसायी गईं, वे हथियार आज किस सफेदपोश या गैंगस्टर के पास हैं? अतुल शाही हत्याकांड, प्रेमनाथ सिंह हत्याकांड, रामनरेश शर्मा हत्याकांड एवं रामप्रवेश सिंह हत्याकांड में प्रयुक्त एके-47 अब किसके हाथ में है? खैर आप पढ़िए विभेष त्रिवेदी (हिंदुस्तान दैनिक ) की खबर।

पूर्व मेयर समीर कुमार को शहर में हेलमेट वाले हमलावर से खतरे का आभास पहले से था। इसका खुलासा उनके फेसबुक पोस्ट से हो रहा है। उन्होंने गत 13 अप्रैल को दिन के 11.37 बजे अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा था-‘मुजफ्फरपुर में अपराध पर लगाम लगाना है तो शहर के अंदर हेलमेट पहनकर चलने पर रोक लगाना होगा। नहीं तो सीसीटीवी का भी काम नहीं!’ गत 23 सितंबर की शाम के करीब सात बजे शहर के चंदवारा इलाके में फायर स्टेशन के निकट हेलमेट वाले हमलावरों ने एके-47 से समीर कुमार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उनकी आशंका को सच साबित कर दिया। बाइक सवार दोनों हमलावर हेलमेट पहने थे। यही वजह है कि घटनास्थल के निकट के सीसीटीवी कैमरे का फुटेज ठोस साक्ष्य जुटाने में नाकाम रहा।

पुलिस समीर हत्याकांड की जांच में कई सवालों के जवाब ढूंढ़ रही है। समीर कुमार को किन लोगों से खतरे का आभास था? दुश्मनी नई थी या पुरानी? खतरा अंदर से था या बाहर से? अगर खतरा बाहर से था तो क्या उनके सिंडिकेट के सदस्य खतरों से बेखबर थे? करोड़ों की प्रोपर्टी डीलिंग में सिंडिकेट के सदस्यों को किन लोगों से चुनौती मिल रही थी? ऐसे कौन-कौन सौदे हैं, जिनमें करोड़ों के भुगतान के बावजूद टकराव की नौबत थी? समीर कुमार की हत्या से किसे करोड़ों का फायदा हुआ है? कहां-कहां विवाद चल रहा है? उन विवादों में से ऐसा कौन-कौन विवाद है, जिनमें एके-47 से गोलियां बरसायी जा सकती हैं?

शूटर-सेटर पर चुप्पी से कई आशंकाएं

शहर में इस बात की व्यापक चर्चा है कि समीर कुमार पर अचूक निशाना साधने के लिए सेटर ने एक साथ कई गुर्गों को लगाया था। समीर कुमार के आगे-पीछे बाइक व गाड़ी पर दूसरे दस्ते भी चल रहे थे। आशंका इस बात की है कि समीर कुमार चाहे जिस रास्ते से भी घर लौटते, 23 सितम्बर को उन पर हमला तय था। पुलिस ने घटना के बाद कुछ संकेत मिलने का दावा किया था, परन्तु शूटर-सेटर के नाम का खुलासा नहीं किया। सुर्खियों में कई नाम आए हैं, लेकिन हेलमेट की वजह से सीसीटीवी फुटेज ऐसे किसी नाम पर मुहर नहीं लगा पा रही। मुजफ्फरपुर के मनियारी, मुशहरी और बेगूसराय के अपराधी की भूमिका व लोकेशन की टोह ली जा रही है। पुलिस पता कर रही है कि मनियारी-गजपट्टी क्षेत्र में पिछले एक साल से शूटर से मिलने कौन-कौन जाता था? बेगूसराय के अपराधी की मुजफ्फरपुर के बेला थाना क्षेत्र की गतिविधियों की भी छानबीन की जा रही है।

सिंडिकेट सदस्यों की बन रही सूची

पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए शहर के प्रोपर्टी डीलरों की सूची बनायी है। जांच के तथ्य पर पर्दा रखने की रणनीति के तहत पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि सिंडिकेट सदस्यों की सूची में अंदर-बाहर के कौन-कौन प्रोपर्टी डीलरों के नाम हैं? प्रोपर्टी डीलरों के मोबाइल कॉल डिटेल्स खंगाले जा रहे हैं। खासकर 23 सितंबर की शाम के मोबाइल कॉल व लोकेशन पर नजर है। कुछ प्रोपर्टी डीलरों से पूछताछ भी की जा चुकी है। घटना के बाद सुर्खियों में आया एक प्रोपर्टी डीलर भूमिगत बताया जा रहा है।

एके-47 वालों की सूची

पुलिस की नजर मुजफ्फरपुर के उन सफेदपोशों और गैंगस्टर पर है, जिनके पास एके-47 या एके-56 है। मुजफ्फरपुर में राजनेताओं समेत ऐसे दस गैंगस्टर हैं, जिनके पास एक से लेकर आधा दर्जन तक एके-47 या एके-56 हैं। इनमें से कुछ के ठिकानों पर समीर कुमार की हत्या के बाद छापेमारी भी की गई है। अंडरवर्ल्ड के सूत्रों की मानें तो चार पुरुष एवं महिला राजनेताओं के पास एके-47 हैं।

कहां-कहां के शूटर

पुलिस छानबीन कर रही है कि वारदात को अंजाम देने के लिए कहां-कहां के शूटर बुलाए गए थे? प्राय: साजिश की गोपनीयता बनाये रखने के लिए मुजफ्फरपुर के सेटर बेगूसराय या दूसरे जिले के शूटर को सुपारी देते हैं। शहर में रामदयालुनगर और मलंग स्थान के बीच में कार से घर लौट रहे प्रथम श्रेणी के ठेकेदार रामनरेश शर्मा और उनके चालक को 13 मई 2004 को एके-47 से भूना गया। रामनरेश शर्मा पर हमले में एक दर्जन से अधिक शूटर- गैंगस्टर शामिल थे। बेगूसराय के शूटर जय जयराम कुंवर उर्फ ‘जीएम’ को सुपारी दी है गई थी। कहा जाता है कि शूटर जीएम को बाद में गैंगस्टर ने अहमियत और सुपारी की तय राशि नहीं दी। मार्च 1997 में मुजफ्फरपुर के जीरो माइल चौक पर ओंकार सिंह हत्याकांड में मोकामा के गैंगस्टर ने गोलियां बरसाई थी।

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