मुजफ्फरपुर : लीची व लहठी के लिए देश-विदेश के लिए दुनिया में मशहूर मुजफ्फरपुर में अब रेशम उद्योग की संभावनाएं तलाशी जा रहीं। इसे देखते हुए केंद्रीय रेशम बोर्ड ने जिले में रेशम कीटपालन की योजना को स्वीकृति दे दी है।अनुसूचित जाति परिवार के सशक्तीकरण से जुड़ी इस योजना के लिए एक करोड़ रुपये का आवंटन कर दिया गया है। 1आधा एकड़ जमीन वाले किसान की तलाश: सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) रामनंदन सिंह ने बताया कि योजना के लिए अनुसूचित जाति से जुड़े किसानों का चयन किया जाना है। कम से कम आधा एकड़ जमीन वाले अनुसूचित जाति के किसान को शहतूत की खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्हें रेशम कीटपालन की इस योजना से जोड़ा जाएगा।

इस वित्तीय वर्ष में सौ किसानों का होगा चयन: शुरुआती चरण में एक वित्तीय वर्ष में सौ किसानों का चयन किया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से आवेदन लिए जाएंगे। अंतिम रूप से किसानों का चयन जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। इन किसानों को कीटपालन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। 20-20 की संख्या वाले किसानों के समूह के लिए एक-एक मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी। सोलर संचालित इस मशीन से ककून से रेशम निकाला जाएगा।

राशि आवंटित

संभावनाओं को देखते हुए केंद्रीय रेशम बोर्ड ने जिले में रेशम कीटपालन को दी मंजूरी

अनुसूचित जाति के सशक्तीकरण से योजना को जोड़ा, शुरुआती चरण के लिए राशि स्वीकृत

केंद्र व राज्य सरकार उपलब्ध करा रही राशि

योजना के लिए केंद्र व राज्य सरकार राशि उपलब्ध करा रही। योजना की 80 फीसद राशि केंद्र सरकार देगी। इस वित्तीय वर्ष के लिए एक करोड़ 69 हजार रुपये केंद्र सरकार ने मंजूर की है। वहीं राज्य सरकार ने 11 लाख 34 हजार रुपये स्वीकृत किए हैं।

सरकार से राशि उपलब्ध करा दी गई है। अब योजना पर कार्य शुरू किया जाएगा। अनुसूचित जाति के किसानों को इससे जोड़ना है। शीघ्र ही उनके चयन के लिए आवेदन लिए जाएंगे। रामनंदन सिंह, सहायक उद्योग निदेशक (रेशम)

Input : Dainik Jagran

 

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