बैरिया बस पड़ाव में दबंगई चलती है। बस संचालकों के बलबूते एजेंट व कंडक्टर यात्रियों के साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं। सीट देने व जल्दी बस खुलने की बात कह हाथ पकड़ कर यात्रियों को पहले बस में बैठाते हैं। उनके साथ दु‌र्व्यवहार किया जाता है। किराया लेने के बाद बीच रास्ते में उतार देने की धमकी भी दी जाती है। मुजफ्फरपुर-पटना रूट में ऐसी घटना आए दिन होती है। रविवार को जब दैनिक जागरण की टीम बैरिया पहुंची तो हर ओर अराजक स्थिति नजर आई।

मुख्य द्वार पर पटना जानेवाली एक बस खड़ी थी। उसके पीछे दूसरी बस का चालक लगातार हॉर्न बजा रहा था। कंडक्टर आपस में उलझे हुए थे। इतने में परिवार के साथ आए एक आदमी को आगे की बस का एजेंट हाथ पकड़ कर बस में बैठा लेता है। बस धीरे-धीरे आगे बढ़ जाती है। पत्‍‌नी नीचे ही रह जाती है। पति चिल्लाने लगता है। बस को आगे रोक कर पत्‍‌नी को भी जल्दी से बैठा कर बस रवाना हो जाती है।

Bairiya Bus Stand, Muzaffarpur
Pic by Chandan

खटारा बसों पर भी ओवरलोडेड यात्री : खटारा बसें भी ओवरलोड होकर चलती हैं। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं। सीतामढ़ी, शिवहर व समस्तीपुर जानेवाली अधिकतर बसों की यही स्थिति होती है। बस के अंदर क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने के बाद छत पर भी यात्रियों को बैठाया जाता है। इससे भले ही बस संचालकों को लाभ हो, मगर यात्रियों की जिंदगी संशय में बनी रहती है।

बैरिया बस पड़ाव में परिचालन को लेकर बस संचालकों में रार चल रही है। परमिट विवाद में यहां अक्सर मारपीट होती है। अनहोनी की आशंका से अन्य बस संचालक व यात्री सहमे हैं। आए दिन बस चालक-खलासी आपस में उलझ रहते हैं। मारपीट व सड़क जाम अलग से। इससे परिचालन पर भी असर पड़ रहा है। यहां से सफर करनेवाले लोगों को परेशानी हो रही है। सूचना पर पुलिस पहुंच कर मामले को शांत करा देती है, लेकिन लिखित शिकायत नहीं होने से वह कार्रवाई नहीं कर पा रही। यह सब अधिकतर लंबी दूरी की बसों में हो रहा है। पटना, बेतिया, भिट्ठामोड़, सिल्लीगुड़ी, जयगांव, पूर्णिया, राची व बोकारो आदि की बसों में ये विवाद अधिक है।

बताया जाता है कि एक से अधिक बसों के एक ही समय पर परिचालन की स्थिति से ऐसा हो रहा है। विवाद की शिकायत क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार तक पहुंचने के बाद भी अधिकारी मौन हैं। बिहार मोटर्स ट्रांसपोर्ट फेडरेशन ने आवेदन देकर परमिट विवाद से अवगत कराते हुए मामले की जांच करने व विवाद को खत्म कराने का अनुरोध किया था। लेकिन, अब तक इस ओर कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

बैरिया बस पड़ाव से सरकार को लाखों का राजस्व प्राप्त होता है। हर दिन हजारों लोग यहां से सफर करते हैं। यहां पेयजल, बिजली, जर्जर सड़क आदि की समस्या नासूर बनती जा रही है। हाईकोर्ट का आदेश भी यहां समस्याओं को पूरी तरह से दूर नहीं कर पा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कोर्ट की कार्रवाई के डर से यहां आनन-फानन काम शुरू हुआ, मगर आधा-अधूरा व घटिया निर्माण कार्य कराया जा रहा है। ज्ञात हो कि 2013 में बैरिया बस पड़ाव समिति की बैठक में 11 प्रस्ताव पास हुए थे। इनमें अधिकतर पर कार्य नहीं हुए। इस मामले में हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। कोर्ट ने निश्चित समय देकर 11 प्रस्ताव एवं कराए गए काम की तस्वीर के साथ कोर्ट में हाजिर होने को कहा। जिस पर पहल हुई, मगर इसमें गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। स्थानीय लोगों ने कहा कि हाई मास्ट लाइट का काम लटका हुआ है। नाले पर स्लैब नहीं रखा गया। डायवर्सन व रोड का काम अब तक नहीं हुआ। पुराने शौचालय का नाला बंद नहीं होने से गंदगी पड़ाव में बह रही है।

Input : Dainik Jagran

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