मीठे जल में मछली उत्पादन के मामले में बिहार देश का चौथा राज्य बन गया है। वित्तीय वर्ष 2017- 18 में यहां मछली का उत्पादन 5.87 लाख मीट्रिक टन हुआ। वित्तीय वर्ष 2017-18 में यह 5.09 लाख मीट्रिक टन था। पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि राज्य में मात्स्यिकी की काफी संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि मछली उत्पादन का वार्षिक लक्ष्य 6.42 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। इस साल चालू वित्तीय वर्ष में लक्ष्य प्राप्त कर लेने की पूरी उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि 2017- 18 में 11 मत्स्य बीज हैचरी का निर्माण किया गया। अब राज्य में निजी क्षेत्र में भी 142 मत्स्य हैचरी हो गई हैं। 2016- 17 में 3002.37 लाख मछली बीज का उत्पादन हुआ, जो 2017-18 में बढ़कर 3730.47 लाख हो गया।

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इस तरह बीज उत्पादन में 24. 25 फीसद की वृद्धि हुई। 2016-17 में जलकर बंदोबस्ती से 947 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो 2017-18 में बढ़कर 1047 लाख रुपया हो गया। इस तरह राजस्व प्राप्ति में 14.49 फीसद की वृद्धि हुई। 2017- 18 में 522. 11 हेक्टेयर नए जल क्षेत्र का सृजन किया गया, जबकि 2016- 17 में 213.75 नए जल क्षेत्र सृजित किए गए थे। राज्य में पहली बार 8680 हेक्टेयर में अंगुलिकाओं का संचय किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में मछली का उत्पादन बढ़ाने के लिए 38 जिलों के मत्स्य पदाधिकारियों के साथ  बैठक की गई। उनको परती जलकरों को मत्स्य जलकर प्रबंधन अधिनियम के तहत दीर्घकालीन बंदोबस्ती कर विकसित करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर मत्स्य निदेशक डॉ निशात अहमद समेत वरीय पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

Input : Dainik Jagran

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