जिला प्रशासन की बागडोर संभालना बच्चों का खेल नहीं। लेकिन, कुछ प्रशासक ऐसे होते हैं जो खेल खेल में कुछ बड़ा और कुछ अलग कर जाते हैं। सीतामढ़ी की डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा भी ऐसी ही हैं। मंगलवार को भी इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला जब उन्होंने नगरपालिका स्कूल की दो छात्राओं को डीएम और एसपी की कुर्सी सौंप दी। न केवल कुर्सी सौंपी वरन उन्हें लोगों की समस्याओं को सुनने को भी कहा।

लोगों की समस्याएं सुनीं

सुंदरम समाहरणालय में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत एक कार्यक्रम में भाग लेने आई थी। डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा के साथ सुंदरम समेत अन्य स्कूली बच्चे कलेक्ट्रेट (समाहरणालय) घूम रहे थे। मगर, डीएम ने उन बच्चों में से एक सातवी कक्षा की सुंदरम को कुछ पल के लिए अपना प्रभार देकर कुर्सी पर बिठा दिया। जिसके बाद सुंदरम ने लोगों की समस्याएं सुनीं। उसने एक मामले में तत्काल कार्रवाई का आदेश देकर अपनी सूझबूझ का परिचय भी दिया। पास में खड़ीं डीएम उसकी बुद्धिमता व प्रशासनिक क्षमता को देखकर खुद भी अचंभित थीं। वे मुस्कुराती हुई भी दिखीं।

नगर पालिका मध्य विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा सुंदरम को मंगलवार को समाहरणालय में डीएम की कुर्सी पर आसीन हो गई। वहां सुप्पी प्रखंड के एक बुजुर्ग सड़क की भूमि का अतिक्रमण कर लेने की शिकायत लेकर पहुंचे। उनकी बातें सुनकर सुंदरम ने तत्काल संबंधित बीडीओ को फोन मिलाया और अविलंब अतिक्रमण हटवाने का निर्देश दिया। सुंदरम ने सात निश्चय योजना के तहत उस भूमि पर सड़क निर्माण कराकर सूचित करने का निदे्रश भी दिया। जहां एक ओर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मुहिम चलाए हुए हैं। वहीं, यहां की डीएम उन बेटियों को अपने हिसाब से आसमान छूने का जज्बा भरने का कोई मौका नहीं छोड़तीं।

एसपी के तेवर देख थानेदार के होश फाख्ता

डीएम बच्चियों को लेकर एसपी कार्यालय पहुंच गईं। जहां उनमें से एक बच्ची को एक दिन का एसपी भी बना दिया। छात्रा ने भी एसपी बनते ही अपनी प्रतिभा का बखूबी प्रदर्शन किया। पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कार्यालय कक्ष में ही शिकायत लेकर कई फरियादी पहुंचे। नई एसपी ने थानाध्यक्ष को फोन लगाया और उन्हें ठीक तरीके से काम करने की नसीहत तक दे डाली।

एक दिन के एसपी ने थानाध्यक्ष को रिश्वत लिए जाने पर सस्पेंड करने की भी चेतावनी दे डाली। थानेदार नई एसपी साहिबा की बात सुन परेशान थे। आखिरकार, ये लेडी सिंघम अचानक उनका एसपी कैसे बन गईं। 7वीं कक्षा की प्रभा के सामने रीगा प्रखंड की एक महिला ने अपने पति की प्रताडऩा की शिकायत की। उसने बताया कि मेरा पति दूसरी शादी करना चाहते हैं। मै दो बच्चों की मां हूं। बच्चों के सामने मुझे मारते-पीटते हैं। हुजूर, मैं कहां जाऊं। इस पर प्रभा ने रीगा थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि आप इसके मामले का शीघ्र निपटारा करें। आरोपी की गिरफ्तारी करें। आपके संंबंध में तीस हजार रुपये घुस लेने की शिकायत मेरे पास आई है। आप पर भी कार्रवाई होगी। जल-जीवन-हरियाली के तहत समाहरणालय के विमर्श कक्ष में मीट योर कलेक्टर-एसपी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसके तहत विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने भाग लिया। जिसने नायक फिल्म के एक दिन के सीएम की याद ताजा कर दी।

Input : Dainik Jagran