भगवान को लगी चोरों की ‘नजर’, SOFT TARGET साबित हो रहे उत्तर बिहार के मठ-मंदिर

ठंड के बचे हुए दिन भगवान पर भारी पर पड़ रहे हैं। मंदिरों-मठों में चोरी की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रहीं। विगत दो दिनों में उत्तर बिहार के तीन अलग-अलग जिलों में चोरों ने तीन प्रमुख मंदिरों को अपना निशाना बनाया। यहां से बहुमूल्य मूर्तियां चोरी कर ले गए। गौरतलब है कि इन मंदिरों में सुरक्षा के पर्याप्तन उपाय नहीं किए जाने के कारण चोरों के लिए ये साफ्ट टारगेट साबित हो रहे।

भगवान को लगी चोरों की ‘नजर’, SOFT TARGET साबित हो रहे उत्तर बिहार के मठ-मंदिर

ठाकुरबाड़ी को बनाया निशाना

समस्तीपुर जिला अंतर्गत रोसड़ा थाना क्षेत्र में गुरुवार की रात धर्मपुर गांव स्थित रामजानकी ठाकुरबाड़ी का ताला तोड़कर चोरों ने भगवान की पांच मूर्तियों चोरी कर लीं। चोर मंदिर के पिछले भाग से सेंधमारी कर परिसर में प्रवेश कर गए। इसके बाद गर्भगृह में दाखिल हुए और सिंहासन पर विराजमान भगवान राम, लक्ष्मण, माता जानकी के बाल-गोपाल को भी चुराकर ले गए।

उसी तरह पश्चिम चंपारण स्थित नरकटियागंज के रेलवे लोको कॉलोनी में स्थित सिद्धेश्वरी माता मंदिर से शुक्रवार की रात चोरों ने मूर्ति पर लगे चांदी के आभूषणों की चोरी कर ली। माता सरस्वती और लक्ष्मी के प्रतिमा से नथिया और टीका भी चोरी कर ली गई।

सीतामढ़ी से दो जोड़ी मूर्तियों की चोरी

शुक्रवार की रात में ही सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर थाना क्षेत्र स्थित अथरी गांव में बाबा वाणेश्वर नाथ मंदिर से चोरों ने राधा-कृष्ण की दो जोड़ी मूर्तियों की चोरी कर ली। इसमें एक जोड़ी सोने की तथा एक जोड़ी चांदी की मूर्ति थी। मंदिर में स्थापित राम दरबार से रत्नजडि़त बहुमूल्य मुकुट भी चोरी कर ली गई।

इन मूर्तियों की कीमत लाखों में आंकी जा रही है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस इन मूर्तियों को तलाशने में जुट गई है, लेकिन अभी तक सफल नहीं हो सकी है। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालने से लेकर टावर लोकेशन के आधार पर भी जांच की जा रही है, लेकिन अभी कोई महत्वपूर्ण सुराग हाथ नहीं लगे हैं।

पूर्व में हुई थी करोड़ों की चोरी

समस्तीपुर स्थित रोसड़ा के धर्मपुर ठाकुरबाड़ी में चोरी की यह घटना कोई नई नहीं है। वर्ष 1997 में भी अष्टधातु निर्मित भगवान की सारी मूर्तियों की चोरी कर ली गई थी। करोड़ों की मूर्ति चोरी होने के 22 वर्ष बाद भी पता नहीं चल सका। आज भी स्थानीय ग्रामीण तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए यह कहने से बाज नहीं आ रहे हैं कि यदि उस समय पुलिस सक्रिय होती तो बरामदगी संभव थी।

इस घटना के बाद ठाकुरबाड़ी परिसर में जुटे विभिन्न मठों के महंतों की मानें तो भगवान की मूल मूर्तियां चोरी होने के बाद 1997 में ही अयोध्या और बनारस से तांबे एवं कांसे निर्मित भगवान राम-सीता-लक्ष्मण तथा बाल-गोपाल की मूर्तियां लाकर विधि-विधान एवं अनुष्ठान कराकर स्थापित की गई थीं।

Input : Dainik Jagran

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