जाने बिहार की मिट्टी से ही क्यों निकलते हैं देश के सबसे ज्यादा आईएएस

667

बिहार सबसे ज्यादा आईएएस देने वाला राज्य है। यही नहीं आईएएस कैडर का हर दसवां आदमी बिहार का है। केंद्र सरकार का हर आठवें सचिव बिहार कैडर के हैं।

रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा सेहत के महकमे में भी बिहार कैडर के अफसरों का ही दबदबा है। सिविल सर्विसेज में बिहार की भागीदारी को लेकर चाहे जो भी धारणा हो लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले दस वर्षों में

बिहार ने देश को 125 आईएएस ऑफिसर दिए हैं। खासबात यह है कि सी-सैट के लागू होने बाद यह धारणा बनाई जा रही थी कि सिविल सर्विसेज में बिहार की भागीदारी घटेगी, लेकिन बिहार ने इस धारणा को भी बदल दिया है और सफलता का ग्राफ बढ़ा ही है।

Image result for IAS"

हालांकि, यह अलग बात है कि पिछले 11 वर्षों में यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 पर कोई बिहारी नहीं आया है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि आईएएस के तौर पर चयन के मामले में बिहारी कैंडिडेट्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। केंद्र में जहां एक ओर खाद्य मंत्री के रूप में रामविलास पासवान पद को संभाल रहे हैं। वहीं उनके अलावा सचिव संजीव हंस बिहार कैडर के हैं। इनके अलावा संयुक्त सचिव, अतिरिक्त सचिव और अपर सचिव स्तर के कई अधिकारी इसी राज्य के हैं। राज्य से आनेवाले मंत्रियों की पहली पसंद भी बिहार कैडर के आईएएस होते हैं।

बिहार की स्थिति हो रही बेहतर 
एक रिकॉर्ड के मुताबिक बिहार से आईएएस अधिकारियों की संख्या में पिछले 20 साल में काफी इजाफा हुआ है। 1997 से 2006 के बीच 11 सालों में देश भर से चुने गए 1588 आईएएस अधिकारियों में से बिहार से 108 (6.80 प्रतिशत) शामिल रहे। यह आंकड़ा अगले 11 सालों में बढ़ा। वर्ष 2007 से 2016 के बीच देशभर से चुने गए कुल 1664 आईएएस अधिकारियों में से बिहार से 125 (7.51 प्रतिशत) शामिल हुए। हालांकि यह बढ़ोतरी अभी बिहार से कुल आईएएस अधिकारियों की संख्या में कम है।

देश में 9.38 प्रतिशत के साथ बिहार दूसरे नंबर पर
देश की सबसे कठिनतम परीक्षा है संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली सिविल सर्विस परीक्षा। इसमें टॉप रैंकर्स बनते हैं आईएएस। ये टॉप रैंकर्स कैसे बनते हैं, इसका फिक्स फॉर्मूला तो अब तक किसी को नहीं मिला लेकिन टॉपर्स में बिहार आज भी दूसरे नंबर पर है। देश भर के कुल 4925 आईएएस अधिकारियों में 462 अकेले बिहार से हैं। यानी 9.38 प्रतिशत टॉप ब्यूरोक्रेट्स बिहारी हैं। इस मामले में बिहार से आगे सिर्फ उत्तरप्रदेश है जहां के 731 (14.84 प्रतिशत) आईएएस अधिकारी हैं।

केंद्र में 52 विभाग में 7 के सचिव बिहारी आईएएस
बता दें केंद्र में 52 विभाग हैं जिनमें से सात के सचिव बिहार कैडर के हैं। राज्य कैडर के कुल 42 आईएएस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। संजीव हंस, एन सरवन कुमार, सर्वानन एम, कुंदन कुमार, अभय कुमार सिंह और बी कार्तिकेय विभिन्न मंत्रियों से संबद्ध् हैं। एम सर्वानन प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह से जुड़े हैं।

1987 से 1996 के बीच रहा सबसे अच्छा प्रदर्शन 
बिहार से आईएएस अधिकारी बनने के मामले में सबसे सुनहरा वक्त 1987 से 1996 के बीच रहा था। इस दौरान यूपीएससी के जरिए कुल 982 आईएएस अधिकारियों का चयन हुआ, जिसमें अकेले बिहार से 159 अधिकारी शामिल थे। यानि तब बिहार से आईएएस बनने की दर 16.19 फीसदी रही।

सिविल सर्विस में भी बेहतर प्रदर्शन
सिविल सर्विस की परीक्षाओं में कभी बिहार के विद्यार्थियों की संख्या अधिक थी लेकिन 1990 के बाद इसमें गिरावट आई। अब एक बार फिर बिहार के विद्यार्थी इसमें अच्छा कर रहे हैं। एक्सपर्ट डॉ. एम. रहमान बताते हैं कि 2011 में सीसैट पैटर्न लागू हुआ। सीसैट में अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता ने बिहारी अभ्यर्थियों के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं। हालांकि अभी सीसैट को क्वालिफाइंग कर दिया गया है, जिसका परिणाम आने वाले सालों में देखने को मिलेगा।

ग्रामीण विकास में भी बिहारियों का दबदबा
सबसे ज्यादा बिहार कैडर के आईएएस एक विभाग में हैं और वह है ग्रामीण विकास। इस विभाग के राज्यमंत्री रामकृपाल यादव भी बिहार के हैं। ग्रामीण सड़क और इंदिरा आवास के निर्माण की जवाबदेही इसी विभाग पर है। 1987 बैच के बी प्रधान को गृह मंत्रालय में परामर्शी का महत्वपूर्ण पद दिया गया है। यह संयुक्त सचिव स्तर का पद है।

संभाल रहे केंद्र के महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी
1980 बैच के अरुण झा राष्ट्रीय जनजाति आयोग के सचिव हैं। इससे पहले जनजातीय मंत्रालय में सचिव थे। गिरिश शंकर तीन सितम्बर 2015 को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आए। पहले गृह मंत्रालय में तैनाती हुई। अभी भारी उद्योग विभाग के सचिव हैं। यह केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण विभाग है। नवीन वर्मा को उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। बिहार कैडर के चर्चित अधिकारी अमिताभ वर्मा जहाजरानी मंत्रालय के अधीन अंतर्देशीय जल परिवहन प्राधिकार के अध्यक्ष हैं।

स्वास्थ्य और संस्कृति भी इनके जिम्मे
1980 बैच के आईएएस नरेंद्र कुमार सिन्हा दो विभागों के सचिव हैं। संस्कृति मंत्रालय में तैनात हैं। पर्यटन की अतिरिक्त जिम्मेवारी है। वह पांच मई 2015 से प्रतिनियुक्ति पर हैं। 2 साल बाद रिटायर वह होंगे। सीके मिश्रा को बड़ी जवाबदेही मिली हुई है, वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव हैं। 1982 बैच की रश्मि वर्मा वस्त्र मंत्रालय की सचिव हैं जिसकी मंत्री स्मृति इरानी हैं। इनका कार्यकाल नवम्बर 2018 तक है। विभाग के लिहाज से भानु प्रताप शर्मा भी काफी महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वाह कर रहे हैं। वह कार्मिक एवं प्रशिक्षण, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के सचिव हैं। यह विभाग प्रधानमंत्री के अधीन आता है। शर्मा पिछले साल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आए हैं।