पटना हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों की फर्जी-अमान्य सर्टिफिकेट की निगरानी जांच में तेजी लाने का सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जो शिक्षक अपने सर्टिफिकेट की जांच कराने में कोताही बरतेंगे, उनका वेतन फरवरी 2021 से रोक दिया जाएगा। चीफ जस्टिस संजय करोल तथा जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की खण्डपीठ ने रंजीत पंडित की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कहा। कोर्ट ने निगरानी ब्यूरो से दो हफ्ते में अद्यतन रिपोर्ट मांगी, ताकि पता चले कि अब तक कितने सर्टिफिकेट जांच के लिए भेजे गए हैं?

सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता व निगरानी ब्यूरो के सीनियर एडवोकेट अंजनी कुमार ने कोर्ट को बताया कि 3 लाख से अधिक शिक्षकों के रिकार्ड की जांच की जा रही है। जांच के दौरान अब तक 1275 प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। 489 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। अभी हजारों की तादाद में शिक्षा अधिकारियों से प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने शिक्षा विभाग को इस काम में ढिलाई बरतने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

इस मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।जिन शिक्षकों के फोल्डर निगरानी ब्यूरो को जांच के लिए नहीं मिल सका है, वैसे शिक्षकों को वेब पोर्टल पर अपना शैक्षणिक और प्रशिक्षण संबंधी सभी सर्टिफिकेट अपलोड करने होंगे। वेबपोर्टल पर जिलावार, प्रखंडवार और नियोजन इकाई वार विवरणी संबंधित जिला के डीईओ कार्यालय द्वारा अपलोड होगा। निर्धारित समय सीमा में प्रमाणपत्र अपलोड करना है। इससे संबंधित विज्ञापन भी प्रकाशित कराया जाएगा।

1 लाख 3 हजार 917 नियोजित शिक्षकों के दस्तावेज नहीं मिले
1 लाख 3 हजार 917 नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक व प्रशिक्षण संबंधी प्रमाणपत्र के फोल्डर निगरानी को अब तक नहीं मिले हैं। 2006 से 2015 के बीच नियुक्त 3,52818 शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्षों के प्रमाणपत्रों की जांच निगरानी को करना है। हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर 2016 को यह आदेश दिया था। 35053 फोल्डर्स डीईओ कार्यालय में उपलब्ध है। यह मेधा सूची के अभाव में निगरानी द्वारा नहीं लिया जा रहा है।