Home Bihar छपरा रेल फैक्ट्री बनकर तैयार, एक साल में बनेंगे 100 डीजल इंजन

छपरा रेल फैक्ट्री बनकर तैयार, एक साल में बनेंगे 100 डीजल इंजन

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पूर्वोत्तर रेलवे के रेल महाप्रबंधक राजीव अग्रवाल और डीआरएम एसके झा ने मढ़ौरा रेल इंजन कारखाना निर्माण का जायजा लिया। निरीक्षण के क्रम में उन्होंने पाया कि निर्माण कार्य 90 फीसदी तक पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने वैसे मीडिया को कुछ भी बताने से परहेज किया, पर सूत्रों के अनुसार जनवरी से इस कारखाने में डीजल इंजन का निर्माण शुरू हो जाएगा। कारखाना अमेरिका की कंपनी जीई इलेक्ट्रिकल के नाम से है। इस कंपनी ने हर साल 100 इंजन निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। यहां जो भी इंजन तैयार होंगे वे देश के कोने-कोने में जाएंगे। रेल महाप्रबंधक और डीआरएम ने इंजन तैयार होने के बाद उसे विभिन्न जगहों पर भेजने के लिए कारखाने से मढ़ौरा स्टेशन तक ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था की जानकारी ली। इस क्रम में डीआरएम को आदेश दिया गया कि कारखाना से लेकर स्टेशन तक रेल लाइन बिछाई जाए।

साथ ही अन्य जरूरी व्यवस्था पूरी की जाए। अधिकारियों के अनुसार यह योजना लगभग 400 करोड़ की है। इसमें 30 फीसदी राशि रेलवे खर्च कर रही है और 70 फीसदी कंपनी खर्च कर रही है। इस योजना के पूरे हो जाने से सारण का नाम विश्व पटल पर आ जाएगा। क्योंकि रेल इंजन निर्माण के कुछ गिने चुने ही स्थल हैं। इतना ही नहीं स्थानीय लगभग दस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। चंवर क्षेत्र का तेजी से विकास होगा।

मढ़ौरा में जब कारखाने का निरीक्षण रेल महाप्रबंधक और डीआरएम कर रहे थे तभी डीआरएम का पैर कारखाने में बिछे पटरे पर फिसल गया और वे गिर गए। इससे उनके दोनों घुटने में चोट आयी है। निरीक्षण के बाद रेल महाप्रबंधक सड़क मार्ग से ही मढ़ौरा से गोरखपुर के लिए रवाना हो गए। वहीं डीआरएम एसके झा बाई रोड छपरा पहुंचे। यहां उनके लिए जंक्शन पर खड़ी सैलून में इलाज हुआ। रेलवे के डॉ.एके तिवारी और शहर के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा.आलोक कुमार ने डीआरएम की जांच पड़ताल की। डॉक्टरों ने बताया कि हड्डी नहीं टूटी है केवल चोट लगी है। दर्द और टेटभेक का इंजेक्शन दिया गया है। स्टेशन डायरेक्टर अरविंद पांडेय, स्टेशन अधीक्षक एकेएस राठौर समेत अन्य रेल अधिकारी सैलून के वाराणसी रवाना होने तक डटे रहे।

डीआरएम के चोट लगने के बाद उनकी सुविधा के लिए छपरा जंक्शन के एक नंबर प्लेटफार्म पर 3.30 पर उनका विशेष सैलून खड़ी कर दी गई थी। जब वे 4.00 बजे जंक्शन पहुंचे तो 10 मिनट के इलाज के बाद 4.10 पर सैलून को वाराणसी के लिए रवाना किया गया। इतने देर तक एक नंबर ट्रैक व्यस्त रहा।

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