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सुबह में ढोयी बालू की बोरियां, शाम में लग गए एनडीआरएफ के साथ… ऐसे हैं डीएम साहब

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न पद का गर्व न ही कपड़े गंदे होने की परवाह। बांध टूटने से गरीबों पर आफत नहीं आए, सिर्फ इसकी चिंता। तभी तो, पूर्वी चंपारण के पताही में बाढ़ का जायजा लेने डीएम रमण कुमार पहुंचे तो अलग अंदाज में नजर आए। अधिकारियों को निर्देश देने के साथ खुद भी बांध की मरम्मत में जुट गए। मजदूरों के साथ कंधे पर बालू की बोरी लेकर रेनकट ठीक करने लगे। 

दरअसल शनिवार को जब जिले के पताही और ढाका में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई तो डीएम रमण कुमार प्रशासनिक टीम के साथ पताही प्रखंड के देवापुर खोड़ीपाकड़ घाट पर पहुंचे। यहां बागमती खतरे के निशान से उपर बह रही है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी तटबंध पर हुए रेनकट को जैसे ही देखा। यहां खड़े मजदूरों से कुदाल ले ली और बोरी बालू भरकर रेनकट वाले स्थान को भरने लगे।

फिर तो तमाशा देखने वाले भी जुट गए काम में

फिर क्या था। जो लोग रेनकट का तमाशा देख रहे थे वो भी मरम्मत काम में लगे लोगों के साथ जिलाधिकारी संग काम करने लगे और देखते-देखते कुछ ही देर में तात्कालिक तौर पर बांध को ठीक कर लिया गया। हालांकि, जिलाधिकारी ने मौके पर तैनात विभागीय अभियंता व प्रशासनिक अधिकारियों को हिदायत दी कि किसी भी स्थिति में तटबंध टूटने नहीं चाहिए।

डीएम की हिदायत के बाद अधिकारियों में हड़कंप

डीएम की इस हिदायत और खुद के कंधे पर उठाकर बालू की बोरियों को भरने के प्रयास के बाद अधिकारियों में हड़कंप मचा है और जो जहां है, वहीं जन सुरक्षा के कार्यों में लगा है। दिनभर के निरीक्षण के बाद डीएम ने शाम में भी आराम मुनासिब नहीं समझा। डीएम होने के ठसक से बाहर रहे और देरशाम निकलकर ढाका प्रखंड में लालबकेया के कहर से लोगों को बचाने की कवायद तेज कर दी। जिलाधिकारी ढाका के सराठा गांव में एनडीआरएफ की टीम के साथ पहुंचे। टीम के अधिकारियों से तत्काल ग्रामीणों के समक्ष राहत व बचाव कार्य करने की कवायद तेज की। देर रात तक वे फिल्ड में ही जमे रहे।

कहते हैं पूर्वी चंपारण के डीएम 

पूर्वी चंपारण के डीएम रमण कुमार कहते हैं कि आम आदमी की जिंदगी की रक्षा सबसे अहम है। आम लोग वहां बांध को लेकर चिंतित थे और काम कर रहे थे। मैंने भी श्रमदान किया। यह मेरा नैतिक दायित्व था। ऐसा सभी को करना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों को आपात स्थिति में अपने पद की ठसक से बाहर निकलकर आम आदमी के साथ कदमताल करना चाहिए। ऐसा करने से बड़ी से बड़ी आपदा को आदमी टाल सकता है। मैंने जो किया वह एक आदमी के तौर पर मेरा दायित्व है।

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