नेपाल में बुधवार की सुबह भूकंप के तेज झटके महूसस किए गए. भूकंप काअसर बिहार (Earthquake News) के भी कुछ जिलों में देखने को मिला. भूकंप का केंद्र काठमांडू के पास 10 किलोमीटर नीचे था साथ ही इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.4 मापी गई. सुबह 5 बजकर 4 मिनट पर आए भूकंप के झटके बिहार के सहरसा, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर समेत नेपाल से लगे जिलों में महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र काठमांडू के पास था. अभी तक भूकंप से किसी नुकसान की कोई खबर नहीं है.

नेपाल की राष्ट्रीय भूकंप मापी केंद्र ने झटके की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.3 बताया है। भूकंप के झटके से एकबार फिर नेपाल की राजधानी काठमांडू में दहशत का माहौल है। लोग घरों से भागकर सड़कों पर निकल गए। इसको लेकर अफरातफरी का माहौल रहा। हालांकि अभीतक इस झटके से किसी भी तरह के जानमाल की क्षति की कोई सूचना नहीं है। नेपाल के साथ साथ बिहार के सीमावर्ती जिले चंपारण, सहरसा, मुजफ्फरपुर आदि जिलों में भी महसूस किए गए है। बताया जा रहा है कि भूकंप के समय अधिकांश लोग अभी सो रहे थे। इधर बाढ़, कोरोना का कहर के बाद भूकंप के झटके से लोगों में दहशत का माहौल है।

शिवहर में भी भूकंप के झटके महसूस किए जाने की सूचना है। जिले में बुधवार की अलसुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। जिस वक्त भूकंप आया, लोग गहरी नींद में थे। हालांकि, जो लोग घरों में थे, वह बाहर निकल गए। शिवहर, पुरनहिया और पिपराही के इलाकों में लोगों ने झटका महसूस किया। हालांकि, जिले में कहीं भी भूकंप से जान- माल की क्षति नहीं हुई है। लोग दहशत में हैं। भूकंप का केंद्र नेपाल का काठमांडू घाटी बताया गया हैं। नेपाल में जब भी भूकंप आता है। इसका असर सीमावर्ती इलाकों में पड़ता हैं।

धरती पर भूकंप आता क्यों है?

हम सभी कुछ ना कुछ गड़बड़ करते रहते हैं. कभी-कभी धरती भी गड़बड़ कर देती है, बल्कि रोज कर देती है. पूरे ग्लोब पर रोज-रोज कहीं ना कहीं कुछ खटपट होता रहता है. छोटे-छोटे वाले तो कुछ नहीं कर पाते. पर जब कहीं कुछ बड़ा हो जाता है, तो पता चलता है कि भूकंप आ गया है.

अगर धरती को छेद के देखें तो ये तीन लेयर में होती है. सबसे ऊपरी लेयर को क्रस्ट कहते हैं. ये क्रस्ट पूरी धरती को घेरे रहता है. मतलब हमारे पांव के नीचे की जमीन और नदी-समंदर के नीचे की भी जमीन. ये बहुत ही मोटी परत होती है. जो हम देख पाते हैं, इससे बहुत गहरी. तो हमारी जमीन के नीचे बहुत सारी प्लेट्स होती हैं. आड़ी-तिरछी. इधर-उधर. एकदम फंसी हुई. एक हिली तो दूसरी भी हिलेगी. एक खिंची तो कई और खिंच जाएंगी.

और जब ये ज्यादा हो जाता है, तो ऊपर की जमीन खड़खड़ा जाती है. भूकंप आ जाता है. करोड़ों बरसों पहले जब कई प्लेट्स ऐसे ही टकराई थीं, तब इसी टक्कर से कई सारे पहाड़ बने थे. मतलब हल्के में नहीं लेना है इस टक्कर को. हिमालय भी ऐसे ही बना था. कहीं-कहीं भूकंप के अलावा ज्वालामुखी भी फट जाते हैं. इसमें क्या होता है कि धरती के अन्दर का लावा बाहर आ जाता है. गरम-गरम.