बिहार की सियासत में मकर संक्रांति पर लालू प्रसाद यादव के घर दिए जाने वाला चूड़ा-दही भोज इस बार फीका रहा. मंकर संक्रांति पर लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपने सरकारी आवास पर चूड़ा दही भोज दिया लेकिन ये भोज काफी फीका रहा. लालू यादव के यहां सभी दलों के नेताओं को बुलाया जाता था लेकिन लालू यादव के जेल जाने से इस भोज में फीकापन आ गया है.

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी ने देवी ने अपने सामने बैठाकर बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को हाथों से चूड़ा-दही खिलाया। अगल-बगल कोई नहीं सिर्फ मां-बेटे साथ बैठे और 10 सर्कुलर रोड में मकर संक्रांति मनाई। उन्होंने तिल, चूड़ा, तिलकुट, दाल, चावल अपने बेटे से स्पर्श कराया, जिसे दान किया जाएगा। तेजप्रताप यादव ने इसके पहले मां का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर राबड़ी देवी ने कहा कि आज से नए साल की शुरुआत होती है। आज के बाद जो-जो भी काम करेगा, वह शुभ माना जाएगा। खरमास खत्म हो गया। बिहार के सभी लोगों को मकर संक्रांति की बधाई है। आवास में जो आ रहा है और जो यहां पहले से हैं, उन्हें भी चूड़ा-दही खिलाया जा रहा है। लालू जी के निर्देश पर सभी एमएलए-एमएलसी अपने क्षेत्र में गरीबों को दही-चूड़ा खिला रहे हैं। तेजप्रताप ने कहा कि खरमास के बाद मकर संक्रांति मिठास लाता है। पापा रहते थे तो यहां मेला लगता था। पूरे बिहार से लोग आते थे। वैसे स्ट्रैंड रोड स्थित अपने सरकारी आवास पर हम गरीब-गुरबा को खिला रहे हैं। तेजप्रताप अपने आवास पर विभिन्न जिलों से आए समर्थकों के बीच नजर आए। उन्होंने तमाशा दिखाने आए लोगों के साथ मस्ती की और कैंपस में घोड़े की सवारी की।

आपको बता दें कि 2016 में मकर संक्राति पर लालू यादव के घर हुआ दही-चूड़ा भोज काफी चर्चा में रहा था. तब जदयू भी महागठबंधन का हिस्सा थी. कई बड़े नेताओं का आमंत्रित किया था. लालू यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दही का टीका भी लगाया था. लालू यादव के दही चूड़ा भोज में नेताओं के अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी आते थे.

तेज प्रताप यादव ने तो अपने सरकारी आवास पर दही चूड़ा भोज का आयोजन किया लेकिन तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इस भोज में हिस्सा नहीं लिया. इसके अलावा जदयू के वरिष्ठ नेता बशिष्ठ नारायण सिंह के घर भी इस बार मकर संक्रांति का भोज नहीं हुआ.