मार्च से मई के बीच प्रस्तावित पंचायत चुनाव EVM से होगा। मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब पंचायती राज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को इससे जुड़ी तैयारियां पूरी करने के लिए लिखित सहमति भेज दी है। पंचायती राज विभाग के सचिव AL मीणा ने भास्कर से हुई बातचीत में इसकी जानकारी दी है। विभाग से मिली इस सहमति के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग EVM की खरीद से जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर पंचायती राज विभाग को सौपेगी। पंचायत चुनाव के लिए EVM की खरीद को मिली इस उच्चस्तरीय स्वीकृति के बाद राज्य निर्वाचन आयोग EVM की खरीद से जुड़ा प्रस्ताव तैयार करेगा।

450 करोड़ का खर्च आएगा
इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से होनेवाली इस खरीद के लिए राज्य निर्वाचन आयोग पंचायती राज विभाग को प्रस्ताव तैयार कर भेजेगा। इसके बाद पंचायती राज विभाग इस प्रस्ताव को कैबिनेट की सहमति के लिए भेजेगा, क्योंकि सिंगल सोर्स से हुई खरीद में निविदा नहीं निकाली जाती है और बिना निविदा वाली खरीद को कैबिनेट का अप्रूवल लेना जरूरी होता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिहार में पहली बार EVM से हो रहे पंचायत चुनाव पर करीब 450 करोड़ का खर्च आएगा, जिसमें 125 करोड़ की लागत से पंचायत चुनाव के लिए मल्टीपोस्ट EVM खरीदी जाएंगी।

9 चरणों में हो सकते हैं चुनाव
अब तक मिल रही जानकारी के अनुसार अधिकतम 9 चरणों में पंचायत चुनाव की तैयारी की जा रही है। वार्ड सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समित और जिला परिषद के करीब 2 लाख 58 हजार पदों पर मार्च से मई के बीच चुनाव होना है। पंचायत चुनाव के लिए खास तरह की EVM की खरीद की जानी है, क्योंकि इस चुनाव में एक साथ 6 पदों के लिए ही मतदान कराया जाता है। इनमें एक कंट्रोल यूनिट (CU) के साथ 8 बैलेट यूनिट (BU) का प्रयोग किया जा सकता है। यानी एक साथ 6 वोट दिए जा सकते हैं। इस खास तरह की EVM में एक डिटेचेबल मेमोरी कार्ड (ABMM) होती है और उसको हटाया जा सकता है। उस कार्ड को हटाकर दूसरे कार्ड का भी प्रयोग किया जा सकता है। इस तरह की EVM को स्ट्रांग रूम में रखने की जरूरत नहीं होगी। इस EVM का प्रयोग पहले चरण के मतदान के बाद फिर से अगले चरण के मतदान में किया जा सकता है।

4 राज्यों में EVM से हो चुके हैं पंचायत चुनाव
हरियाणा, राजस्थान, केरल और मध्य प्रदेश में EVM से पंचायत चुनाव कराए गए हैं और अब बिहार EVM से पंचायत चुनाव कराने वाला 5वां राज्य बन जाएगा। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल जून में खत्म होगा। बिहार में करीब 172 नये नगर निकायों के गठन के कारण इस बार पंचायतों की संख्या कम हो जाएगी। अब पंचायतों की संख्या करीब 81 सौ रहने का अनुमान है। बिहार में फिलहाल 534 प्रखंड, 38 जिला परिषद और 8387 पंचायतें हैं।