चार दिवसीय चैती छठ बुधवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। गुरुवार को खरना होगा। शुक्रवार को भगवान सूर्य को पहला अर्घ्‍य दिया जाएगा। शनिवार को उगते सूर्य को अर्घ्‍य देने के साथ छठ का पारण हो जाएगा। बाजार में छठ व्रत को लेकर मिट्टी के चूल्हे, आम की लकड़ी एवं फलों की दुकानें सज गई हैं।

आचार्य बुद्धन ओझा ने बताया कि नहाय-खाय के दिन स्नान करने के बाद अरवा चावल, कद्दू की दाल और सब्जी का प्रसाद खाया जाता है। खरना के दिन शाम का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

अमृतजय योग का बन रहा संयोग

आचार्य ने कहा कि चैती छठ पर भगवान भास्कर की कृपा बनने के साथ ग्रह-गोचरों का शुभ-संयोग बन रहा है। चार दिवसीय छठ अमृतजय योग में मनाने के साथ व्रती सर्वार्थ सिद्धि योग में पारण करेंगेे। ओझा ने कहा कि 21 मार्च यानि बुधवार नहाय-खाय के दिन चतुर्थी तिथि एवं भरणी नक्षत्र होने के साथ वैमिति योग का संयोग बन रहा है। बुधवार के दिन चतुर्थी तिथि दिन में 3.22 मिनट तक है।

भारतीय संस्कृति परंपरा के अनुसार चैत मास की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है। ओझा ने कहा कि गुरुवार के दिन व्रती खरना यानी लोहंडा का प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पण करने के साथ ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत करेंगे। गुरुवार 22 मार्च को खरना के दिन पंचमी तिथि एवं वैमिति और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। पंचमी दिन गुरुवार के दिन 1.40 बजे तक है। इसके बाद कृतिका नक्षत्र आरंभ हो जाएगा जो रात में 7.58 बजे तक रहेगा।

आयुष्मान योग में भगवान सूर्य को पहना अर्घ्‍य

ओझा ने कहा कि भगवान भास्कर को पहला अघ्र्य शुक्रवार 23 मार्च को शाम में दिया जाएगा। शुक्रवार के दिन षष्ठी तिथि में डूबते हुए सूर्य को व्रती अघ्र्य देंगे। शुक्रवार के दिन सूर्यास्त शाम 6:01 बजे होगा। इसके पहले भगवान सूर्य को अर्घ्‍य देने की मान्यता है। शनिवार 24 मार्च को उगते हुए सूर्य को अर्घ्‍य दिया जाएगा। शनिवार के दिन मृगशिरा नक्षत्र होने के साथ सौभाग्य योग में भगवान भास्कर को अर्घ्‍य दिया जाएगा। शनिवार के दिन सूर्योदय 5:58 बजे होगा। व्रती घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्‍य देने के साथ अपनी मनोकामना को पूर्ण करेंगे। ओझा ने कहा कि बहुत समय बाद सौभाग्य योग में उगते सूर्य को अर्घ्‍य दिया जाएगा।

बुधवार, चतुर्थी तिथि – नहाए-खाय

गुरुवार, पंचमी तिथि – खरना

शुक्रवार, षष्ठी तिथि – शाम का अघ्र्य

शनिवार, सप्तमी तिथि – प्रात:कालीन अघ्र्य

25 मार्च को मनाई जाएगी रामनवमी

25 मार्च दिन रविवार को रामनवमी मनाई जाएगी। आचार्य बुद्धन ओझा ने कहा कि रविवार के दिन रामवनमी पर नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति अनुकूल है। रामनवमी के दिन आद्रा और पूर्ण वसु नक्षत्र होने के साथ शोभन योग में भगवान राम और भक्त हनुमान की पूजा होगी।

ओझा ने कहा कि चैत मास की नवमी तिथि और कर्क लग्न में भगवान राम का जन्म हुआ था। इस बार भी रामनवमी के दिन कर्क लग्न 12 बजे दोपहर के बाद आ रहा है। ऐसे में भक्त भगवान राम की विशेष पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकते हैं। सुंदर लग्न होने के कारण रामनवमी की महत्ता और बढ़ गई है।

Input : Dainik Jagran

Image Credit : Advay Vridansh

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