स्वर कोकीला लता मंगेशकर अपने शुभचिंतकों और करोड़ों फैंस को पीछे छोड़कर 6 फरवरी को इस दुनिया को अलविदा कह गईं। लता मंगेशकर के जाने के बाद उनके करोड़ों फैंस उन्हें याद करके सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। लता मंगेशकर की प्रोफेशनल उपलब्धियां इतनी ज्यादा रही हैं कि उनकी निजी जिदंगी के बारे में लोग कम ही जानते हैं। लेकिन आज हम आपको उनकी निजी जीवन के बारे मे कुछ बात बताते हैं ।

Lata Mangeshkar Real Name

लता मंगेशकर का वास्तविक नाम हेमा था।

बचपन मे हीं पिता का निधन हो गया था

लता मंगेशकर की निजी जिंदगी बहुत हीं संघर्ष से भरी हुई थी। 28 सितंबर 1929 को इंदौर मध्यप्रदेश मे जन्मी हेमा का स्वर कोकिला लता मंगेशकर बनने तक सफर आखिर कैसा था? चलिये आज बताते हैं। मंगेशी नाम के गांव में रहने वाली लता मंगेशकर उम्र में बहुत छोटी थीं जब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर जी का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी हेमा यानि लता मंगेशकर के कंधों पर आ गई।

खुद तो ज्यादा नहीं पढ़ीं लेकिन बहनों को पढ़ाया

परिवार की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर स्वर कोकीला लता मंगेशकर ने खुद पढ़ाई नहीं की लेकिन अपनी छोटी बहनों को खूब पढ़ाया। लता मंगेशकर स्कूल नहीं जाती थीं लेकिन वह घर में रहकर ही अछे से पढ़ाई किया करती थीं। लता अपने पिता के साथ मराठी संगीत नाटक में काम किया करती थीं इसलिए 14 साल की होने तक वह बड़े कार्यक्रमों और नाटकों में अभिनय करने लगीं।

लता जी को मिलने वाले अवार्ड्स

  • National Film Awards
  • BFJA Awards
  • Filmfare Award for Best Female Playback Singer
  • Filmfare Special Awards
  • Filmfare Lifetime Achievement Award

आशा के लव मैरिज की वजह से बहनों में आई दूरियां

1942 में जब लता मंगेशकर जी के परिवार की हालत थोड़ी बहुत सुधरनी शुरू हुई तभी उनकी छोटी बहन आशा ने लव मैरिज करने की जिद पकड़ ली। इस बात पर दोनों में दूरिया बढ़ गई । और आखिरकार आशा ने सन्न 1949 में गणपतराव भोंसले से शादी कर ली। लता मंगेशकर की अपने परिवार के प्रति सबसे बड़ी कुरबानी ये थी कि भाई बहनों को देखभाल और संभालने के लिए खुद कभी शादी नहीं की।

कभी स्कूल नहीं गईं लेकिन ढेरों हैं डिग्रियां

स्वर कोकीला लता मंगेशकर 36 भाषाओं में गाना गाने वाली पहली सिंगर बनीं, और ये टैग उनसे अब तक कोई नहीं छीन पाया है। लता मगेशकर जी ने एक हजार से भी ज्यादा हिंदी गाने गाए और बाकियों की तो वह गिनती भी भूल चुकी थीं। लता दीदी स्कूल भले ही नहीं जा पाई हों, लेकिन न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी समेत 6 विश्वविधालयों से मानक उपाधि से उन्हे सम्मानित किया था।

 

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