जहां एक ओर पूरे देश में आधार कार्ड को बड़े प्रमाण के रूप में माना जा रहा है. कई बड़ी योजनाओं से लेकर अन्य कार्यों में इसके प्रयोग को चलन में लाया गया है. वहीं बिहार के मुजफ्फरपुर में मामला कुछ और ही हो चला है. आधार कार्ड को इनवैलिड डॉक्यूमेंट बताते हुए थानेदार और सीओ ने एक शादी ही रुकवा दी है. यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ हैं. साहेबगंज थाना क्षेत्र के पिपरा राघों गांव निवासी मोहन तिवारी ने साहेबगंज सीओ, थानेदार और बीडीओ पर गंभीर आरोप लगाये हैं. परिजनों का कहना है कि आधार कार्ड में उम्र 21 साल होने के बावजूद भी उनके बेटे को नाबालिग बता कर शादी रुकवा दी गई है.

दरअसल, मोहन तिवारी के बेटे रौशन तिवारी की 19 अप्रैल को शादी होने वाली थी. लेकिन शादी से दो दिन पहले यानी 17 अप्रैल को पिपरा राघो गांव के सीओ, थानेदार सहित अन्य अधिकारी मोहन तिवारी के घर पहुंच कर इस शादी को रोकने का निर्देश दे दिए. हवाला दिया गया कि रौशन तिवारी अभी नाबालिग है. इसलिए यह शादी नहीं हो सकती है. आला अधिकारी के कड़े निर्देश से दूल्हे के परिजन डर गए. इनलोगों ने आलाधिकारी के सामने आधार कार्ड प्रस्तुत किये. जिसमे उसकी उम्र तकरीबन 21 वर्ष से अधिक हैं. लेकिन अधिकारी लोग आधार कार्ड को नही माने.

पिछले कई वर्षों पहले स्कूल द्वारा निर्गत पांचवी का परित्याग प्रमाण पत्र का  सहारा लेते रहे. अधिकारियों का कहना था कि जो प्रत्याग प्रमाण पत्र पर उम्र है हमलोग उसे मानेंगे. जबकि उम्र से सम्बंधित आधार कार्ड एवं जन्म प्रमाण पत्र के लिए नोटरी द्वारा निर्गत शपथ पत्र भी अधिकारियों के सामने पीड़ित द्वारा प्रसूत किये गए. लेकिन ये लोग आधार कार्ड एवं नोटरी द्वारा निर्गत शपथ पत्र को अनदेखा कर दिए.  फिर प्रशासनिक दबाव से मोहन तिवारी के पुत्र रौशन तिवारी की शादी नही हो पाई. रुक गयी. जिसमे पीड़िता ने तकरीबन लाखों रूपये की नुकसान होने की बात बताई हैं. अलाधिकारियों द्वारा शादी रोकने के लिए दरवाजे पर जाने की क्रम की फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.

अधिकारियों का ये है कहना

इस संबंध में  संपर्क करने पर साहेबगंज थानेदार जितेंद्र प्रसाद ने शादी को रूकवाने की बात स्वीकारते हुए आधार कार्ड की मान्यता को मानने से इंकार कर दिया. और बताया कि अंचलाधिकारी के नेतृत्व में वे वहां गए और स्कूली कगजात जाँच किये. जिसमें रौशन की उम्र नाबालिग अवस्था में पाई गयी. इसलिए शादी को रुकवाई गयी. हलाकि इस संबंध में अधिकारियों को कोई लिखित शिकायत नही हैं. वे मुख्यालय की सूचना पर शादी रोकने की बात बता रहे हैं. वहीं बीडीओ यूनिस सलीम ने बताया कि वे आज पीड़ित के घर गए थे. जहाँ आधार कार्ड की जाँच किये हैं. जिसमें 21 वर्ष से अधिक वर्ष की आयु की पुष्टि हुई हैं.

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