स्वतंत्रता आंदोलन  के दाैरान “तुम मुझे खून दो, मैं तुझे आजादी दूंगा’ का आह्वान करने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज से 81 वर्ष पहले मुजफ्फरपुर के तिलक मैदान में देश की आजादी के लिए क्रांति का शंखनाद किया था। 26 अगस्त 1939 को वे यहां आए  थे और जिलेवासियों में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष तेज करने के लिए जोश भरा था। उस समय नेताजी का भाषण सुनने के लिए कई जिलाें के लोग तिलक मैदान आए  थे। मंच से उतरने के बाद आजादी के दीवानों ने नेताजी को हाथी पर चढ़ा कर मुजफ्फरपुर शहर में घुमाया था। शहर घूमने के दौरान जगह-जगह लोगों ने उन पर फूल बरसाए थे। स्वतंत्रता सेनानी राम संजीवन ठाकुर बताते हैं कि नेताजी का भाषण सुन कर खून में गर्मी आ जाती थी। युवा अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में जान देने के लिए तैयार हो जाते थे। नेताजी काे देखने के लिए तिलक मैदान आये  युवाओं  का जोश व उत्साह भी देखते बनता था। नेताजी का भाषण सुन कर युवाओं ने देश को स्वतंत्र कराने का संकल्प लिया। यहां से नेताजी दरभंगा चले गए थे। गौरतलब है कि नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक-उड़ीसा में हुआ था। उनकी मां का नाम प्रभावती देवी व पिता का नाम जानकी नाथ था। जानकीनाथ प्रसिद्ध वकील थे।

23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ जन्म

26 अगस्त 1939 काे यहां आए  थे नेताजी

06 फरवरी 1940 काे मेहसी गए थे

नेताजी ने मेहसी नागरिक पुस्तकालय के रजिस्टर में लिखे थे अपने अनुभव

दोबारा बिहार यात्रा के दौरान नेताजी ने चंपारण की यात्रा की थी। मेहसी के नागरिक पुस्तकालय के विजिटर्स रजिस्टर में उनकी हस्तलिखित यादें आज भी तरोताजा हैं। उसमें उन्होंने नागरिक पुस्तकालय के संस्थापक की सराहना की थी। साथ ही जनता की सेवा में भागीदारी निभाने का आह्वान किया था। चंपारण यात्रा के दौरान नेताजी ने कई स्थानों पर जाकर अंग्रेजों की दासता को खत्म करने की रणनीति बताई थी। वे देवीलाल साह के घर पर ठहरे थे। उनके निकट सहयोगी लंबोदर मुखर्जी, मंगल प्रसाद श्रीवास्तव, संतसेवक प्रसाद आदि के घरों में आज भी नेताजी की स्मृतियां सुरक्षित हैं।

Input : Dainik Bhaskar