मुजफ्फरपुर : आखिर राशन के अभाव में भूखे तड़प तड़प कर मर गया वो गरीब आदमी

मुज़फ़्फ़रपुर में भूख और गरीबी से लड़ते हुए एक गरीब व्यक्ति के मरने का आया मामला। पिछले चार साल से रासन के लिए दौड़ रहा था पवन कुमार वर्मा।जिला के कुढ़नी प्रखंड के मानियारी थाना क्षेत्र के महंथ मानियारी की ये घटना है।

हद तो तब हो गई जब मौत के बाद सुशाशन कुमार के सचिव साहब ने कहा कि पैसे नही हैं,चंदा कर जलाओ लाश।

आप वीडियो में सुन सकते है सचिव साहब की ओ तल्ख़ भरी आवाज जो मिडिया में आने के बाद अभी ढ़ीली पर गई।

उसके भाई अशोक कुमार वर्मा कई महीनों से दौर लगा रहा था प्रखंड के चक्कर। जिला प्रशासन ने दिया जांच के आदेश। ऐसा ये पहली बार नही हुआ है पूर्व में भी जिला के मोतीपुर प्रखंड के एक गांव में एक अधेड़ की मौत भूख से हो चुकी है।

जब स्थानीय मीडिया बंधू हरकत में आये तो वही सचिव महोदय पैसा और अनाज साथ में लेकर आये। बताइये उस पैसे और अनाज का अब क्या काम?

अगर ऐसे मामलो को खंगाला जाए तो पुरे बिहार के हजारो गाँवो में ऐसे मामले से लोग पीड़ित और परेशान है। चलिये एक ऐसे ही मामले के बारे में बताता हूं जो मेरे पास आया था और जिसका पुख्ता सबूत मेरे पास है। ऐसा मैं इसलिये बता रहा हु ताकि अभी भी प्रशासन हरकत में आ जाए और फिर किसी गरीब की मौत होने से पहले उसका हक़ मिल जाए।

मनियारी के सटे एक पंचायत है अमरख।इस गांव में भी 80 ऐसे लोग है जिंनके पास राशन कार्ड होने के बावजूद भी रात दिन पिछले डेढ़ साल से राशन के लिए भटक रहे है।

जिस डीलर के पास भी ये राशन के लिए जाते है वो अपने क्षेत्र में आवंटन न होने की बात कह कर इन्हें टरका देते है इनलोगों ने कई बार अपनी समस्याये पंचायत में रखी मगर अफ़सोस की आजतक इस पर कोई निदान नही हो पाया।

सोचिये अगर इन्ही 80 आदमी में से कई ऐसे लोग है जो विधवा है जिंनके घर में कोई कमाने वाला नही है उनके खाने के लिए राशन का शहर यही जन वितरण प्रणाली है।अगर इन्ही 80 में से किसी के साथ ऐसी घटना हो जाए तो फिर इसका जिम्मेवार कौन होगा।

आखिर कब सुधरेगा हमारा सिस्टम?आखिर कौन खा रहा है गरीबो का हक़?

1.5K Shares

One thought on “मुजफ्फरपुर : आखिर राशन के अभाव में भूखे तड़प तड़प कर मर गया वो गरीब आदमी”

  1. अगर सरकार द्वारा इस मद मे काफी कम राशि आती है जो तुरंत ही समाप्त हो जाती है ।
    ज्यातर मामलो मे किसी के मरने के तुरंत बाद पैसा नही मिल पाता है क्युकी जब पैसा आता है तबतक मरने वालों की संखया ही इतनी हो जाती है कि नए के लिए पैसा नही बचता है ।
    जो बंधु पंचायत सचिव को अपने पास से पैसा देने को कह रहे है वे भी गलत है ।किसी भी सरकारी कर्मी से इस प्रकार की बात कारना अशोभनीय है ।
    हा ,इतना जरूर है कि अगर कोई कर्मी सही तरीके से काम नही करता तो जिलाधिकारी या अन्य पदाधिकारी के यहॉ शिकायत किया जा सकता है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
1.5K Shares