Home Muzaffarpur मेयर अड़े पर न डिगे नगर आयुक्त, रास्ता मुश्किल

मेयर अड़े पर न डिगे नगर आयुक्त, रास्ता मुश्किल

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तहसीलदारों के सामूहिक तबादले पर नगर निगम में मचा घमासान अभी थमते नहीं दिख रहा। मेयर सुरेश कुमार इस तबादले को सही नहीं मानते हुए निरस्त कराने पर अड़े हुए। उन्होंने पूरे प्रकरण से प्रधान सचिव को भी अवगत करा दिया है। दूसरी तरफ नगर आयुक्त संजय दूबे डिगने को तैयार नहीं है।

रविवार को वार्ड पार्षदों के एक दल ने बीच की राह निकालने के लिए नगर आयुक्त से मुलाकात की। मगर, जवाब जो सवालों के रूप में आये, उससे बात बनती नहीं दिखी। फिलहाल निगम में रस्साकशी का दौर जारी है जिससे शहर का विकास हासिये पर जाता दिख रहा है। यह हाल तब है जब स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित मुजफ्फरपुर शहर की विकास योजनाओं के लिए 80 करोड़ से अधिक की राशि सरकार की ओर से विमुक्त की जा चुकी है।

रविवार की सुबह ही पार्षदों का शिष्टमंडल नगर आयुक्त से मिलने उनके आवास पर पहुंचा। पार्षदों ने वर्तमान बोर्ड के डेढ़ साल आपसी विवाद में निकल जाने की दुहाई दी। तबादला विवाद को तत्काल विराम देने की बात उठाई गई। सशक्त स्थायी समिति के सदस्य राकेश कुमार पिंटू ने नगर आयुक्त से अनुरोध किया कि निगम हित में वे अपने फैसले पर फिर से विचार करें। इस विवाद से शहर का विकास और निगमहित प्रभावित हो रहा है। सशक्त स्थायी समिति के सदस्य राकेश कुमार सिन्हा पप्पू, शेरू अहमद, पार्षद संजय केजरीवाल, हरिओम कुमार, पवन कुमार राम, पार्षद पति विजय झा व इकबाल कुरैशी और पार्षद पुत्र बब्लू कुमार ने भी नगर आयुक्त से इस मामले में तत्काल बीच का रास्ता निकालने का अनुरोध किया ताकि विवाद और आगे बढ़ने से रुके। फिलहाल स्थानांतरित तहसीलदार अपने अपने नये वार्डों में योगदान दे चुके हैं।

इधर, मेयर सुरेश कुमार ने कहा कि मैंने इस मामले में प्रधान सचिव को अपनी आपत्ति से अवगत करा दिया है। साथ ही मामले में हाईकोर्ट में अर्जी देने की तैयारी कर ली है। पार्षदों के आग्रह पर अगर नगर आयुक्त इस तबादले को निरस्त कर दें तो राह निकल सकती है। वैसे मैं अभी प्रधान सचिव के उत्तर की प्रतीक्षा में हूं।

सभी पार्षदों की सुनने के बाद नगर आयुक्त संजये दूबे ने कहा कि इसमें बीच का क्या रास्ता हो सकता है? इस मामले में दो ही विकल्प हैं। अगर गलत तबादला हुआ है तो इसे रद्द कर दिया जाये या फिर कोई गड़बड़ी नहीं हो तो इसे क्यों बदला जाये? तबादले को रद्द करने का कोई कारण तो होना चाहिए। सवाल भरे उत्तर सुनने के बाद भी पार्षदों ने विवाद का हल निकालने का अनुरोध नगर आयुक्त से किया।

Input : Live Hindustan

 

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