पटना से लेकर दिल्ली तक फैला था ब्रजेश ठाकुर का मायाजाल

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Brajesh Thakur

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के साथ सांठगांठ करने वाले समाज कल्याण विभाग के करीब डेढ़ दर्जन अधिकारी व कर्मचारी अब सीबीआइ के रडार पर हैं। इन अधिकारियों और कर्मचारियों से सीबीआइ किसी भी समय पूछताछ कर सकती है। इनमें हाल में सेवानिवृत्त हुए कुछ पदाधिकारी भी शामिल हैं।

इतना ही नहीं, ब्रजेश ठाकुर के रैकेट में शामिल नौकरशाहों की पहचान के लिए सीबीआइ ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जल्द ही सीबीआइ की टीम बिहार सरकार के अन्य महकमों द्वारा ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ व अखबार को लाभ पहुंचाने वाले अधिकारियों की पहचान करने वाली है। ब्यूरो के अधिकारी विभाग के ऐसे पदाधिकारियों व कर्मियों से पूछताछ की भूमिका तैयार कर चुके हैं। सीबीआइ सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार ब्यूरो की टीम स्वास्थ्य विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ व अखबार से जुड़े दस्तावेज हासिल करेगी। बताया जाता है कि ब्रजेश ठाकुर के पारिवारिक अखबार का सकरुलेशन हजार दिखाया गया है। जबकि सीबीआइ को मिली जानकारी के अनुसार केवल सरकारी लाभ प्राप्त करने के लिए इसकी महज दो सौ से तीन सौ प्रतियां ही प्रकाशित होती थी।

सेवा संकल्प को स्वास्थ्य विभाग से हर साल मिलते थे लाखों

समाज कल्याण विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की पड़ताल होती रही। सीबीआइ जल्द ही स्वास्थ्य विभाग का रुख करने वाली है। क्योंकि ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प व विकास समिति को स्वास्थ्य विभाग से भी हर साल लाखों रुपये मिलते रहे हैं। मगर, इसका लाभ आमलोगों को नहीं मिला। स्वाधार गृह में छापेमारी के दौरान भारी मात्र में गर्भ निरोधक सामग्री जब्त की गई। जो लोगों में वितरित नहीं की गई थी। वहीं अपनी धाक के कारण ब्रजेश रोगी कल्याण समिति से भी जुड़ा रहा। वह मनमर्जी से समिति से निर्णय करा लेता।

Brajesh Thakur

मामले में शीघ्र नई प्राथमिकी दर्ज कर सकती है सीबीआइ

सीबीआइ की टीम इस मामले में कुछ नई प्राथमिकयां दर्ज करने की तैयारी में हैं। इनमें सरकार के वैसे पदाधिकारियों को भी नामजद किया जा सकता है, जो लंबे समय से ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ व अखबार को लाभ पहुंचाते रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल हम सभी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।

अबतक पटना के बुद्धा मार्ग स्थित ठिकाने की नहीं हुई तलाशी

ब्रजेश ठाकुर के पारिवारिक अखबार का एक दफ्तर पटना के बुद्धा मार्ग स्थित जादूघर के ठीक सामने भी है। सीबीआइ को भनक लगी है कि ब्रजेश ठाकुर के आदमी इस दफ्तर से कंप्यूटर व अन्य दस्तावेज हटा रहे हैं। यहां ब्रजेश ठाकुर ने अपने अखबार के दफ्तर के ऊपर एक बेडरूम बना रखा है। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि इस दफ्तर में देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहता था। मगर, यहां की अब तक तलाशी नहीं ली गई।

कम बिजली बिल दे रहा गवाही, नाम मात्र के छापे जाते अखबार

ब्रजेश ठाकुर के जिस आवासीय परिसर में तीन-तीन अखबार छपते हैं वहां का बिजली बिल फर्जीवाड़ा को साबित करने के लिए काफी है। यहां लगे प्रेस की मशीन से हिन्दी, अंग्रेजी व उर्दू के एक-एक दैनिक अखबार प्रकाशित होते। सिर्फ हिन्दी अखबार की प्रसार संख्या 62 हजार के करीब बताकर सरकारी विज्ञापन लिए जा रहे। अंग्रेजी व उर्दू इससे अलग है। मगर, इस परिसर में लगे कई मीटरों में से अधिकतम बिल आठ हजार है। जबकि इतनी संख्या में अखबार रोज छापे जाएं तो यह बिल लाखों रुपये होंगे।1एस्सेल से मिली सूचनाओं के अनुसार ब्रजेश ठाकुर के एक मोबाइल नंबर पर छह बिजली बिल भेजे जा रहे। पिता राधा मोहन ठाकुर के नाम पर हर महीने करीब तीन हजार का बिजली बिल भेजा जा रहा है। मां मनोरमा देवी के नाम पर सबसे अधिक छह से आठ हजार का बिल प्रतिमाह आता है। सेवा संकल्प संस्थान के नाम से करीब 2400 रुपये आता है। ब्रजेश ठाकुर के नाम से तीन बिजली कनेक्शन है। उसके नाम पर सबसे कम करीब दो सौ रुपये का बिल आता है। पिता के नाम पर बिजली बिल आने के बाबत एस्सेल पीआरओ का कहना है कि जब तक नाम बदला नहीं जाता, बिल पूर्ववत नाम पर ही आता रहेगा।

Input : Dainik Jagran