सावन के पहले सोमवार पर मुस्लिमों ने पेश की अनोखी मिसाल, हो रही वाह-वाह, जानें पूरा मामला

51

सिटी ब्‍यूटीफुल में सावन के पहले साेमवार पर सांप्रदायिक सद्भाव व प्रेम का अद्भूत नजारा देखने को मिला। इस पावन अवसर पर सेक्‍टर 32 के सनातन धर्म मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पहुंंचे श्रद्धालु मुस्लिम समाज के लोगों की अनूठी पहल देखकर गद्-गद् हो गए। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शिवालय में पहुंचकर श्रद्धालुओं को तुलसी के पौधे बांटे और आपसी प्रेम और एकता का संदेश दिया। चंडीगढ़ में यह संभवत: यह पहली बार है जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने तुलसी के पौधे बांटे। इस दौरान उन्‍होंने हिदुओं के लिए तुलसी के महत्‍व का पूरा ध्‍यान रखा। इस पहल पर पूरे शहर में वाह-वाह हो रही है।

हिंदू-मुस्लिम एकता सद्भाव की दिखी मिसाल, भगवान शिव की पूजा के लिए आए श्रद्धालु हुए बेहद खुश

सावन का महीना हिंदुओं के लिए भगवान शिव शंकर की भक्ति का महीना माना जाता है। सावन का पहला  साेमवार तो हिंदू श्रद्धालुओं के लिए सबसे पावन और विशेष महत्व का हाेता है। इस मौके पर भारी संख्‍या में श्रद्धालु मंदिरों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। तुलसी का पौधा और तुलसी पत्र (तुलसी के पत्‍ते) हिदुओं के लिए बहुत पवित्र होता है और हर पूजा-अर्चना में इसका उपयोग होता है।

प्रेम और एकता का बना रहे माहौल के उद्देश्य से पार्षद हाजी खुर्शीद की अगुवाई में पहल

इसी को देखते हुए नगर निगम के नॉमिनेटिड पार्षद हाजी खुर्शीद के नेतृत्व में मुस्लिम समुदाय के लोग सनातन धर्म मंदिर में पहुंचे और श्रद्धालुओं को पवित्र तुलसी के पौधे बांटे। श्रद्धालु यह देखकर सुखद आश्‍चर्य में पड़ गए मुसिलम समुदाय के लोगों ने श्रद्धालुओं को प्रेम और सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश दिया। उन्‍होंने लाेगों से तुलसी के पौधे का महत्‍व बताया और अपने घरों में लगाने की अपील भी की।

तुलसी के पौधे बांटने वाले लोगों ने कहा कि कोई भी धर्म और उसके त्यौहार लोगों को बांटते नहीं बल्कि जोड़ते हैं। सावन का महीना भी आपस में प्यार का संदेश देता है। यह महीना सभी के लिए खुशियां देता है। इस अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे लोगों ने इस पहल की खूब सराहना की।

‘बचपन से नहीं देखा हिंदू और मुस्लिम समुदाय में फर्क, अब जानकर दुख होता है’

पार्षद हाजी खुर्शीद ने कहा, मैं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला हूं। मेरे गांव में 80 प्रतिशत लोग हिंदू और सिर्फ 20 प्रतिशत लोग मुस्लिम थे। हिंदू समुदाय के लोगोंं ने कभी धर्म के नाम पर हमसे भेदभाव नहीं किया और पूरा प्‍यार व सम्‍मान दिया। शादी से लेेकर हर प्रकार के कार्यक्रम में हिंदू व मुस्लिम समुदाय के लोग एक-दूसरे के यहां आते-जाते थे। मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदुओं के अंतिम संस्कार में जाते थे, शवों को कंधा देते थे और श्‍मशान घाट पर जाकर अंतिम संस्कार का हिस्सा बनते थे।

उन्‍होंने कहा, मैं 20 साल की उम्र में चंडीगढ़ आ गया। इसके बाद समय बदला तो  धर्म और संप्रदाय के नाम पर लड़ाइयां व फसाद होने लगे। लोग मजहब के नाम पर एक-दूसरे से दूर होते गए। यह स्थिति बेहद कचोटने और समाज को नुकसान पहुंचाने वाली है। उसके बाद इंसानियत के नाते पर हिंदू-मुस्लिम एकता पर काम करने का विचार आया और हमने मिलकर यह पहल की।

मेयर को भेंट कर चुके है रामचरित मानस, जल्द कराएंगे सर्व धर्म सम्मेलन

पार्षद हाजी खुर्शीद ने इससे पहले शहर के मेयर को रामचरितमानस की प्रति भी भेंट की थी। हाजी खुर्शीद ने बताया कि वह जल्द ही सर्व-धर्म सम्मेलन कराना चाहते हैं। इसमें भारत के अलावा विदेशों से भी विद्वानों को भी बुलाने का विचार है। उनका हिंदू-मुस्लिम के साथ-साथ अन्‍य धर्मों के लोगों काे करीब लाने की इच्‍छा है।