आप माने या ना माने लेकिन यह सच हैं। सीएम नीतीश कुमार तीसरे मोर्चे की तैयारी में लग गए हैं। यहीं कारण है कि इन दिनों बिहार में गैर भाजपा और राजद नेता के इतर सभी नेता गोलबंद हो रहे हैं। इन सभी नेताओं ने नीतीश के नेतृत्व को लगभग स्वीकार कर लिया है।

सूत्रों से प्राप्त हो रही खबर के अनुसार अगर विगत कुछ दिनों की राजनीतिक घटनाओं पर ध्यान दें तो सब अपने आप स्पष्ट हो जाएगा। बिहार में विभिन्न राजनीतिक दल भले विकाश और सुशासन की बात करते हों, लेकिन चुनाव आते आते जातिगत भावना हावी हो जाती है। भाजपा समर्थक अपने जाति वाले नेता को तो राजद वाले अपने जाति वाले विधायक और सांसद को जीताने में अंदर ही अंदर लग जाते हैं।

बिहार में बदल रही इस राजनीतिक घटनाक्रम की शुरूआत सबसे पहले तब होती है जब नीतीश के कट‍्टर आलोचक पप्पू यादव अचानक सीएम नीतीश कुमार से मिलते हैं और पत्रकारों से बात करते हुए कहते हैं कि नीतीश के नेतृत्व में बिहार विकाश कर रहा है। लालू परिवार ने यूज एंड थ्रो के साथ साथ राजनीति कर बिहार को चौपट कर दिया।

उधर इसी बीच लाइव बिहार के कंसल्टिंग एडिटर कन्हैया भेलारी से विशेष बातचीत में रालोसपा नेता और नीतीश से विरोध के कारण अलग हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि मुझे नीतीश कुमार से कोई परेशानी नहीं है। वह मेरे परम मित्र हैं।

इसी बीच रामविलास पासवान सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात करते हैं और मीडिया के सामने हाथ में हाथ मिलाने वाला फोटों खिंचवाते हैं और कहते हैं कि नीतीश कुमार के तरफ से वह विश्वास दिलाते हैं कि बिहार में NDA एकजूट हैं।

बिहार की राजनीति में खिचड़ी पक रही है या नहीं इसके लिए हमें इस वर्ष भागलपुर में आयोजित हिंदू नव वर्ष के कार्यक्रम में चलना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत के नेतृत्व में जुलूस निकाले जाने के बाद अचानक माहौल दंगा में बदल जाता हैं। दोनों समुदाय की ओर से जवाबी कार्रवाई में कई लोग घायल होते हैं। पूरे जिला में इंटरनेट को ठप कर दिया जाता है। किसी तरह मामले को कंट्रोल किया जाता है। इस बीच इस मसले को लेकर जदयू, राजद और भाजपा के नेताओं में वाकयुद्ध होते रहते हैं।

पटना के गांधी मैदान में बिहार दिवस को लेकर ऐतिहासिक मंच सजा हुआ है। उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू भी उपस्थित हैं। सीएम नीतीश कुमार सभा को संबोधित करते हुए कहते हैं कि- मैं आपलोगों के सामने हाथ जोड़ता हूं, कुछ लोग राम के नाम पर आपको भड़काएंगे। उनके भड़कावे में मत आइएगा।

उधर रामनवमी के बाद से औरंगाबाद, समस्तीपुर, कैमुर सहित अन्य जिले में हिंसक झड़प की खबर आती है। सीएम नीतीश कुमार को विपक्ष इस मामले पर जमकर घेरते हैं। जवाब देने के बदले सीएम नीतीश कुमार चुप्पी साध लेते हैं। साथ ही केंद्र की मोदी सरकार तक संदेशा पहुंचाते हैं कि अगर इस तरह चलता रहा तो साथ चलना असंभव होगा।

Source : Dailyhunt.in

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