बिहार में हर पांच मिनट में एक व्यक्ति की मौत टीबी से हो जाती है। केंद्र सरकार की ओर से इसकी दवा की व्यवस्था की गई है। टीबी का कीड़ा खोजने की व्यवस्था है, लेकिन अभी भी लोगों में इसके प्रति जागरूकता की कमी है। देश में हर दिन चार हजार से अधिक लोग टीबी की चपेट में आते हैं। टीबी कोई आनुवांशिक रोग नहीं है। यह एक संक्रामक रोग है, जिससे नियमित इलाज से छुटकारा पाया जा सकता है। यदि बीच में भी इलाज छोड़ दिया गया तो संबंधित मरीज की मौत भी हो सकती है।

जानें टीबी को

टीबी (ट्यूबर क्लोसिस) एक संक्रामक रोग है, जो बैक्टीरिया के कारण होता है। बैक्टीरिया व्यक्ति के शरीर में घुसकर सभी अंगों को प्रभावित कर देता है। यह सबसे अधिक फेफड़ा में पाया जाता है और धीरे-धीरे आंत, मस्तिष्क, हड्डी, गुर्दा, त्वचा व हृदय को प्रभावित कर देता है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं हुआ तो संबंधित व्यक्ति की मौत तक हो जाती है।

ये हैं टीबी के लक्षण

– तीन सप्ताह से अधिक समय से खांसी रहना।

– भूख कम लगना और छाती में दर्द रहना।

– बलगम के साथ ब्लड आना।

– सांस लेने में परेशानी होना।

– फेफड़े में इंफेक्शन होना।

ऐसे करें बचाव

बच्चों को जन्म के एक महीने के भीतर टीबी का टीका लगवाएं।

– खांसते या छींकते समय मुंह को ढंक कर रखें।

– टीबी के रोगी जगह-जगह ना थूकें।

– शराब या सिगरेट से दूर रहें।

– अधिक मेहनत वाला कार्य ना करें।

– पूरी दवा का सेवन करें आराम करें।

– नियमित पौष्टिक भोजन करें।

सुरक्षा की अहम भूमिका

टीबी मरीजों की सुरक्षा काफी अहम होती है। स्थिति यह है कि टीबी रोगियों के कफ, छींकने या खांसने के सीधे संपर्क में आने से भी स्वस्थ व्यक्ति इसका शिकार हो सकता है। पीडि़त व्यक्ति द्वारा छोड़ी गई सांस से वायु में बैक्टीरिया फैलता है। इससे स्वस्थ मनुष्य इसका शिकार बन जाता है। ध्यान रहे कि मरीज के छूने या हाथ मिलाने से कोई बीमारी नहीं होती।

एक्स-रे या बलगम जांच से हो जाती है जानकारी

टीबी मरीजों की जानकारी एक्स-रे या बलगम की जांच से आसानी से हो जाती है। कभी-कभी जानकारी नहीं मिलने पर जीन एक्सपर्ट मशीन से इसका पता चलता है। एमडीआर टीबी की भी इसी से जानकारी होती है। इसके अतिरिक्त आइजीएम हीमोग्लोबिन जांच करके भी टीबी का पता लगाया जा सकता है।

डॉट्स सेंटर पर पाएं मुफ्त में दवा

टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है। भारत सरकार के डॉट्स केंद्र पर इसकी दवा पूरी तरह निश्शुल्क मिलती है। डॉक्टर द्वारा बताए गए कोर्स की पूरी दवाएं नियमित रूप से खाकर बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

प्रोटीन युक्त भोजन करें

टीबी के मरीजों को संतुलित आहार के साथ हाई प्रोटीन भोजन करना चाहिए। मरीजों को खाने में किसी प्रकार का परहेज नहीं कराया जाता है। दूध, अंडा, मुर्गा, मछली आदि में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है। साथ ही लौकी, तुलसी, हींग, आम का रस, अखरोट, लहसुन, देसी शक्कर व अंगूर भी बहुत लाभप्रद होता है।

(डॉ. अशोक शंकर सिंह, विभागाध्यक्ष, टीबी एंड चेस्ट रोग, पीएमसीएच से विशेष बातचीत।)

Input : Dainik Jagran

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