शहर में एक या दो नहीं ग्यारह जलमीनार हैं। लेकिन किसी काम की नहीं। लाखों रुपये की लागत से निर्मित इन जलमीनारों से दूर-दराज तक लोगों के घरों तक पानी पहुंचाना था। लेकिन इनकी स्थिति ऐसी है जैसे कि इन्हें सिर्फ देखने के लिए बनाया गया था। इसलिए, इसे देखकर ही अपनी प्यास बुझाइए। जी हां, जलमीनार के माध्यम से लोगों के घरों तक पीने का पानी पहुंचाने के लिए शहर में नये एवं पुराने ग्यारह जलमीनार स्थापित हैं। उनमें से दो या तीन डेड हो चुके हैं शेष कार्यरत। पर कार्यरत जलमीनारों से आपूर्ति नहीं हो रही, कारण पानी चढ़ाने के लिए लगे पंपों को अक्षम बताया जा रहा है। पंपों को बदलकर जलमीनारों को चालू किया जा सकता है पर इसकी परवाह न निगम के जनप्रतिनिधियों को है और न ही किसी अधिकारी ने इसकी सुध ली। एक दशक से सभी जलमीनार हाथी दांत बने साबित हो रहे हैं। जनप्रतिनिधि व अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

Pic by Manoj Singh – Location – Jail Chowk

मिनी पंप को लेकर मारामारी, जलमीनारों की अनदेखी : पिछले एक साल में निगम ने लोगों के घरों तक जलापूर्ति के लिए जगह-जगह मिनी पंप लगाकर पानी के प्रेशर को बढ़ाया। सात-सात लाख रुपये खर्च कर दो दर्जन से अधिक मिनी पंप लगाए गए। जलमीनार के माध्यम से पानी की आपूर्ति करने पर न सिर्फ पानी का प्रेशर बढ़ सकता है बल्कि दूर-दूर तक पानी पहुंचाया जा सकता है। ऐसे में जलमीनारों को चालू करने की जरूरत किसी ने नहीं समझी।

Input : Dainik Jagran

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