जिले की प्रसिद्ध शाही लीची के फलों में लाली आने लगी है। यह शहरी क्षेत्र के लीची में पेड़ों में लगी फलों में आई है। लीची के फलों में ऊपर से यह लाली जरूर दिख रही है, लेकिन इसमें स्वाद आने में अभी 15 से 20 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा।

सर्किट हाउस व ईदगाह परिसर की लीची में आई लाली : शहरी क्षेत्र के जिला अतिथि गृह (सर्किट हाउस) व मिठनपुरा गोशाला रोड स्थित ईदगाह परिसर के बागों की लीची में लाली आई है। ये ऐसे बाग हैं, जहां हर साल सबसे पहले लीची में लाली आती है। इनकी लाली हर कोई को ललचाना शुरू कर दिया है। हालांकि, इसके फल अब भी खट्टे हैं। जिससे यह खाने लायक नहीं है।

देहाती क्षेत्रों में हरे हैं लीची के फल : देहाती क्षेत्रों के बागों में फिलहाल लीची के फल हरे ही हैं। इसमें लाली आने व पूरी तरह परिपक्व होने में कम से कम 15 से 20 दिनों का समय है। आमतौर पर 25 मई के बाद ही शाही लीची अपने शबाब पर होता है। उस समय उसके फलों में रस भर जाता है और यह बेहद स्वादिष्ट स्थिति में होता है। तभी लीची के फलों की तुड़ाई की जाती है। बाजार में भी तब बिक्री जोरो पर रहती है। जून के पहले सप्ताह के बाद चाइना प्रभेद की लीची के पकने का समय होता है। जून के तीसरे सप्ताह तक का समय चाइना प्रभेद की लीची का होता है। लगभग एक माह तक दोनों प्रभेदों की लीची से बाजार गुलजार रहता है।

लीची पर पड़ सकती मौसम की मार : इस साल लीची की बेहतर फसल है। लीची उत्पादक किसान संघ के अध्यक्ष बच्चा सिंह के अनुसार अभी तक लीची की स्थिति ठीक- ठाक है, लेकिन मौसम को लेकर आशंका बढ़ी है। कांटी के प्रसिद्ध लीची किसान मुरलीधर शर्मा के अुनसार इन दिनों पुरवा हवा चल रही है तथा मानसून पूर्व वर्षा हुई है। ये दोनों स्थितियां लीची के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे लीची के फलों में कीड़े का प्रकोप हो सकता है। मौसम की मार से तैयार होने के समय लीची की फसल बर्बाद हो सकती है।

फलों के बचाव के लिए ये करें उपाय : राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुशहरी के निदेशक डॉ. विशालनाथ के अनुसार अब तक फसल की स्थिति बेहतर है। हालांकि इस समय मौसम प्रतिकूल चल रहा है। इससे लीची के फलों के बचाव के लिए इमीडाक्लोरोपिड की 0.5 मिली व लंबाडासाइलोसेंड की 0.5 मिली मात्रा को एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इससे फलों में कीड़े नहीं लगेंगे। फलों को फटने से बचाने के लिए एक सप्ताह बाद प्रति लीटर पानी में बोरॉन के चार ग्राम की मात्रा का घोल बनाकर फलों पर छिड़काव करें। शहरी क्षेत्रों की शाही लीची में आई लाली के संबंध में उन्होंने बताया कि ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां सही तरीके से कृषि कार्य नहीं किए जाते हैं। जिससे समय से पहले ही लीची के फलों में लाली आ जाती है।

Input : Dainik Jagran

 

Pics Credit : Runni Saidpur – City Of Baalushahi

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