जिस देश में 20 करोड़ लोग हर रोज भूखे सो जाते है उस देश की सरकार उपवास पर बैठी है। क्या फिर बीजेपी ने कोई इमोसनल चाल चला है?

आपने ये तो सुना होगा की विभिन्न मांगो को लेकर फलना संगठन ,फलना पार्टी अनशन पर बैठी है। मगर अचरज तब होता है जब सत्ता पर बैठी बहुमत की ही सरकार अपने विपक्ष के खिलाफ देश के विभिन्न जिला प्रशाशनिक कार्यालयों पर अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अनशन पर बैठती हो।

आपको बताते चलु की आज 12 अप्रैल को देश की बीजेपी सरकार के प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री ,सांसद, विधायक एवं सभी पार्टी कार्यकर्ता देश के विभिन्न जिलों के प्रशाशनिक कार्यालयों पर उपवास अनसन कर विपक्ष पर यह आरोप लगाते हुए की विपक्ष संसद की कार्यवाही नही चलने दे रहे है उसके लिए धरना पर बैठी थी।

आखिर ऐसा क्या है कि इतनी कम संख्या वाले विपक्ष को मनाने में संसदीय कार्य मंत्री विफल साबित हो रहे है।क्या हालात इतना बदतर हो गया है कि एक बहुमत से बनी सरकार को विपक्ष के खिलाफ धरना देना पड़ रहा है। यह पहली सरकार है जिसके शाशनकाल में सबसे कम संसद की कार्यवाही चली है।

यह बहुत ही विडंबना है कि जिस देश में बेरोजगारी, भुखमरी अपने चरम सीमा पर है उस देश का पक्ष विपक्ष ये उपवास वाला कित कित वाला खेल रहा है कभी विपक्ष दलित की राजनीती के नाम पर उपवास करता है तो कभी सत्ता पक्ष विपक्ष के संसद स्थगन के विरोध पर। मगर आमजनता से जुरा मुद्दा किसी के लिए भी महत्वपूर्ण नही है चाहे वह पक्ष हो या विपक्ष।

अभी तक संसद में कई ऐसे बिल पेश हुए जो राजनेता के फायदे की थी ओ चुपके चुपके हो गई और उसमे किसी तरह का हंगामा नही हुआ।चुपचाप ही राष्ट्रपति,राज्यपाल इत्यादि का वेतन बढ़ गया।पार्टियों को विदेशी चंदा का कोई जाँच न हो उसके लिये भी आसानी से बिल पास हो गया।
कोई हंगामा तक नही ,कोई स्थगन तक नहीं।

मगर जब वर्तमान सरकार के पांच साल बीतने को है और देश की जनता के सवाल पूछने की बारी आ गई की है कि इन पांच सालों में उनके नेताओ ने उनके लिए किया क्या है तो सरकार ने लोगो को दिखावे के लिए फिर से इमोसनल गेम खेलना शुरू कर दिया है।

सरकार अब अपने नेताओं को जिला मुख्यालय प्रखंड मुख्यालय भेजकर लोगो से यह कहने को कह रही है कि विपक्ष उन्हें सदन नही चलाने दे रही है।
एक बहुमत वाली सरकार के लिए ए कितना बेतुका बात है कि एक शक्तिशाली सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए जनता से यह कह रही हो की विपक्ष उन्हें सदन नही चलाने दे रही है।

ज़रा गंभीरता से सोचियेगा की देश के भिन्न भिन्न क्षेत्रो में मासूमो के बलात्कारों से देश के लोगो में गुस्से की आग जल रही है वही सरकार उपवास का नया इमोसनल नाटक कर रही है।

जहाँ देश कई दिनों से जातीय आरक्षण के सवालो पर हिंसक रूप से जलता रहा वही देश के चौकीदार सिर्फ इसलिए उपवास पर है कि विपक्ष सदन नही चलने दे रहा ।
जिस देश का करोड़ो रूपये लेकर एक उद्योगपति भाग जाता है उस पर किसी तरह का सवाल ही नही,न कोई बयान।आखिर इतनी चुप्पी क्यों?

ज़रा सोचिए कि ए उपवास है या उपहास है उन युवाओ पर जिन्होंने दिल्ली के सड़को पर कई दिनों तक उपवास रहकर नौकरियो में घोटाले की जाँच की मांग की मगर उस बात पर अभी तक सरकार ने कुछ भी करवाई नही किया।

ऐ अलग बात है की देश की मीडिया हर रोज 20 करोड़ मजबूरन उपवास पर रह जाने वाली भूखे जनता को नही दिखा पाती मगर एक दिन शौक से रहने वाली राजनेताओं के उपावस को राष्ट्रीय उपवास कहकर दिखलाती है।

अब तो समय ही बताएगा कि यह उपवास देश के आमजनता के लिए कितना कारगर होता है या यह सिर्फ वर्तमान सरकार का इमोसनल राजनीती स्टंट है।

बस अंत में इतना ही कहूँगा की साहब जब सरकार ही उपवास और धरने पर उतर आई है तो कभी बेरोजगारी, गरीबी,महंगाई,और भष्टाचार पर भी धरना कर ही लीजिये ताकि जनता को यह आसानी से कह सके की विपक्ष ने कुछ नही करने दिया तो हम क्या करे।
युवा पत्रकार संत राज़ बिहार की कलम से।

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