भारत में बलात्कार की परिभाषा बदलती जा रही है भारत में वही रेप मान्य होता है जो मुस्लिम के द्वारा हिन्दू के साथ या हिन्दू के द्वारा मुस्लिम के साथ किया जाता है।

मै बार बार कहता हूं कि देश सिर्फ ब्रांडिंग मार्केटिंग से चलने लगी है।मगर अचरज तो इस बात की है कि रेप की भी ब्रांडिंग होने लगी है और गौर फरमाइयेगा देश में हर रोज सैंकड़ो रेप के केसेज आते है ओ भी दिल दहलाने वाले मगर देखिये कैसे किस्म की रेप की घटनाएं सोसल मिडिया पर ट्रेंड करती है।

एक वह घटना जो जिसमे दुर्भाग्य ब्स मंदिर की सलिम्प्तता आती है ओ भी जाँच में संसय के साथ तो उस घटना को तीन महीने बाद भी जबकि देश में उस घटना के बाद 2000 रेप की घटनाएं हो चुकी होती है,फिर भी उसका रिफ्रेंस देकर एक खास धर्म और भगवान को टारगेट किया जाता है।
ऐसा क्यो क्योकि एक मुस्लिम का बलात्कार हिन्दू ने किया था और उसके लिए पूरे देश में जस्टिस का तमगा लगाकर सोसल मिडिया पर करें कानून की मांग करते है और करा कानून बन भी जाता है।फिर ये सारे लोग ऐसे चुप हो जाते है जैसे इस देश से बालात्कार शब्द ही खत्म ही हो गया हो।

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मगर दुर्भागय की उस दिन के बाद से रेप की संख्या में और बढ़ोत्तरी होने लगती है।कानून की घोषणा के रात ही मुज़फ़्फ़रपुर में 10 वर्षीय मासूम के साथ एक ऐसी रेप की घटना होती है जो आम इंसान को दिल दहला दे।एक 28 वर्षीय व्यक्ति उस मासूम को बहला फुसला कर अपने घर के पीछे ले जाता है और उसके साथ बालात्कार करता है और जब वह मासूम दर्द की पीड़ा की हदों से गुजरती है तो वह दरिंदा उसके दर्द की आवाज को सदा के लिए गला दबा कर खत्म कर देता है।

कल होकर वह दरिंदा पकड़ा भी जाता है,मगर लानत की न यहाँ कोई मोमबत्ती गैंग और न कोई सोसल मिडिया यूनिवर्सिटी का छात्र सब इस घटना को ट्रेंड करता है जबकि विगत कुछ दिनों में देखे तो कोई भी घटना,आंदोलन या बंदी को हवा देने में मुज़फ़्फ़रपुर सबसे आगे रहा है।क्या इस दरिंदे को फाँसी नही दिया जाना चाहिए,बताइये यह घटना क्या किसी भी घटना की दरिंदगी से कम है क्या?

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मगर शायद इस घटना में हिन्दू या मुस्लिम किसी भी धर्म का टारगेट कोटा पूरा नही हो सकता इसलिये ये मामला गुमनाम सा हो गया।और किसी ने भी इस दरिंदे की फांसी की मांग न की और न इस घटना पर विशेष कोई राजनीती दल या संग़ठन ने अपनी संवेदना व्यक्त की।

फिर कुछ चंद दिनों बाद दिल्ली में एक मासूम के साथ ऐसी ही दरिंदगी की घटना होती है जिसमे मस्जिद और मुस्लिम व्यक्ति की सलिम्प्तता आती है तो फिर से एक बार सोसल मिडिया पर रेप का मामला ट्रेंड करता है जैसे की शायद बहुत दिनों बाद देश को फिर से एक रेप की घटना मिली हो और पीड़िता के इंसाफ के लिए लोग सोसल मिडिया की सड़को पर उतरते है
और फिर से जवाबी कारवाई की तरह एक खास धर्म और उसके उपासना स्थल को टारगेट करना शुरू कर देते है।

सवाल यह है की क्या हम रेप की घटनाओं में भी इसी तरह हिन्दू मुस्लिम करते रहेंगे।क्या मुस्लिम भाई उस वक्त का इंतेजार कर रहे होंगे की कोई हिन्दू फिर कोई मुस्लिम लड़की के साथ रेप करेगा तो हम उनके धर्म और भगवान को टारगेट कर सोसल मीडिया की सड़को पर उतरेंगे रेप के खिलाफ।
या हिन्दू भाई उस वक्त का इंतेजार करेंगे की कोई मुस्लिम व्यक्ति किसी हिन्दू लड़की के साथ बलात्कार करेगा तो ही हम उसकी फांसी या बलात्कार की मांग करेंगे।

नहीं साथियो ऐ बहुत गरबर हो रहा है इस तरह अगर हम बालात्कार की घटनाओं को भी धर्म के आधार पर सेलेक्टिव कर उसे ट्रेंड करते रहे और बालात्कार खत्म करने की जगह धर्म के आधार पर बलात्कारियों को खत्म करने की बात सिर्फ करते रहे तो हमें लगता है, कि बालात्कार तो खत्म नही ही हो सकता मगर समाज की एकता और अखंडता जरूर खत्म हो जायेगी।

हमे सोचना होगा की जब हर कोई बालात्कार की निंदा ही करता है तो फिर ए घटना हो कैसे जाती है?असल में बालात्कार कोई व्यक्ति नहीं जो गिन गिन कर मार दिया जाए यह एक घिनौना सोच है जिसे गिना नही जा सकता।
यह ऐसा हैवानियत जहर है जो लोगो में वासना का भूख जगाता है और भूख न मासूम देखता है न उम्र का तकाजा और न रिश्तों की बंदिशें देखती है। और यह वासना दिमाग में पलने के पीछे कई अहम चीजो का योगदान होता है पहले हमें उसे खत्म करना होगा।

एक तरफ आप अश्लील वीडियो,अश्लील संस्कृतियों,उत्तेजक खान पान।हवस वाली प्रेम को प्रोमोट करते है।
जहाँ रात 10 बजते नेट पर करोड़ो युवा पोर्न वीडियो का सर्च मारने लगते है।और वहाँ आप समाज से सीधे सीधे बालात्कार ख़त्म की कल्पना करते है तो ऐ सिर्फ भावनात्मक स्टांन्ट है और कुछ नही।
देश में गूगल सर्वे बताता है कि आज के युवा गूगल पर किसी महापुरुष की जीवनी से ज्यादा सनी लियोन की पोर्न वीडियो सर्च करते है आप सोच सकते है कि उसके दिमाग में क्या भरेगा।

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ऐ वही देश है जहां करमचंद गांधी नाम का एक व्यक्ति राजा हरिश्चन्द जैसा फिल्म देखकर जिंदगी भर सत्य और अहिंसा का पुजारी बन जाता है।ऐसे कई उदाहरण है जिसे दू तो लेख लंबा हो जाएगा।

अब हम और आप ही को सोचना होगा की आज की पीढ़ी का रौल मॉडल कौन बन रहा है।
एक तरफ हनी सिंह जिसके हर गाने में शराब पीने की बात होती है और अश्लील नृत्यंगन्नाओ द्वारा युवाओ मो उत्तेजित किया जाता है और एक तरफ भगत सिंह जैसा भी रौल मॉडल इस देश में है।

मगर देखिये और सुनिये की आज की हमारी युवा पीढ़ी की झुकाव किस ओर है।अगर झुकाव हनी सिंह की ओर है अगर झुकाव सपना चौधरी के उठापटक डांस की ओर है जिसमे एक खास शरिर के हिस्सों का प्रदर्शन किया जाता हो और वह डांस के किसी भी फॉर्म में नही आता हो तो यह कल्पना करना ही छोर दीजिये की बालात्कार सिर्फ फांसी या बालत्कारियो को खत्म कर देने से खत्म हो जायेगि।

अगर आप कभी बिहार में वर्तमान भोजपुरी गीतों को सुन ले तो शायद आपको यह एहसास होगा की आप पोर्न वीडियो नही देख रहे मगर जो पोर्न में होता है वह आपको गीत के माध्यम से सीधे सीधे बताया जा रहा है।

बालात्कारी तो खत्म हो ही मगर बालात्कार जैसी सोच को पैदा करने वाली कारणों का भी खात्मा करना होगा।
ऐ मेरा निजी विचार है बाद बाकी आपलोगो की मर्जी।

युवा पत्रकार संत राज़ बिहारी की कलम से।

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