पवित्रता-आस्था का पर्व है छठ, PM मोदी से लोग कर रहे हैं इसे राष्ट्रीय पर्व बनाने की मांग

स्वच्छता, पवित्रता और आस्था का महापर्व छठ पूजा को राष्ट्रिय पर्व घोषित कर दिया जाना चाहिए।हम बिहार वासियों की ये सरकार से विनीत अनुरोध है।मोदी सरकार के स्वच्छ भारत अभियान का छठ पर्व स्वाभाविक प्रतीक है। जिसमे अमिर से गरीब और आला अधिकारी से मजदुर तक सबके सब हाथ में झाड़ू और खुरपी कुदाल लिए इस पर्व के दौरान अपने गली मोहल्लो और आस पड़ोस की स्वतः सफाई करते बिहार के हर गाँव शहर में दिख जाते हैं।

सिर्फ यही नही इस पर्व में लोग(गंगा) नदी नालो की भी सफाई करते हैं। इस पर्व में सूर्य को नदी-तालाब किनारे ही अर्ध्य दिया जाता है। अतः इस पर्व को गंगा सफाई अभियान का भी ब्रांड एम्बेसडर बनाया जाना चाहिए। साथ ही फल फुल गन्ना नारियल आदि इस पूजा में नेवेद्य के रूप में प्रयोग होता है यानि यह पर्व प्रकृति के पूजा पवित्रता और इसके सम्मान का भी सन्देश देता है और पर्यावरण की शुद्धता पर मोदी जी ने यु एन में अपने दिए गए भाषण में उल्लेख भी किया था।इतना ही नही यह एकता का भी प्रतीक पर्व है जिसमे जात पात ऊँच नीच का भेद समाप्त हो जाता है और सबके सब एक साथ दीखते हैं।

बस जरुरत है इसे आदत में शुमार करने की। हमारा तो मानना है की लोक आस्था के इस महापर्व को स्वच्छ भारत अभियान का भी ब्रांड एम्बेसडर होना चाहिए।

वास्तव में यह पर्व मोदी सरकार के दो प्रमुख एजेंडे गंगा सफाई और स्वच्छ भारत अभियान का सदियों से न सिर्फ प्रतिनिधित्व करता आया है बल्कि क्षेत्रवाद,जातिवाद और सम्प्रदायवाद जैसे कुत्सित और घृणित राजनितिक भावनावों को भी ख़ारिज करता आया है।

और राष्ट्रिय एकता एवं अखंडता को व्यावहारिक रूप प्रदान करता रहा है।वर्तमान सरकार जो कहती है वो अगर करना भी चाहती है तो यह पर्व उनके आदर्शों का ही प्रतीक है।वस्तुतः प्रधानमंत्री जो करना चाहते हैं वो सदियों से हमारे बिहार में छठ पर्व के दौरान होता आया है और यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा। अतः छठ को राष्ट्रिय पर्व होने का हर प्रकार से अधिकार है।

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