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पिता बोले- मैं तो उसे करता था और उसी ने मेरा नाम रोशन कर दिया, आरती ने 8 पन्नों में लिखकर दी अपने संघर्ष की कहानी…

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नया साल खेल जगत में हनुमानगढ़ जिले का नाम रोशन करने वाली खबर के साथ खुशी लेकर आई। परिवार की आर्थिक तंगहाली के बाद भी संघर्ष करते हुए जिले के पीलीबंगा कस्बे की बेटी आरती वर्मा ने 59 किलो भार वर्ग में गोल्ड मैडल के साथ स्टेट बेस्ट वुमेन लिफ्टर का खिताब हासिल किया। उदयपुर में हुई 50 वीं स्टेट सीनियर वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिता में आरती ने दमदार प्रदर्शन कर हनुमानगढ़ जिले का नाम रोशन किया। आरती की उपलब्धि के साथ ही उसकी संघर्ष की कहानी भी उन खिलाड़ियों को प्रेरित करने वाली है जोकि पारिवारिक हालात से समझौता कर लेते हैं। आर्थिक स्थिति नहीं होने से नेशनल प्रतियोगिता में सिलेक्शन होने के बाद प्रेक्टिस नहीं कर पाने के कारण पिछड़ने के बाद भी आरती ने हौंसला नहीं छोड़ा। भास्कर के आग्रह पर आरती ने खुद अपने संघर्ष की कहानी लिखकर भेजी है, जानिए 23 वर्षीय आरती ने किस तरह किया संघर्ष।

आरती बोली…सुबह-शाम प्रेक्टिस करती, दोपहर में पढ़ाई, लक्ष्य एक ही था- बेस्ट लिफ्टर बनना

”वर्ष 2015 में दूसरे खिलाड़ियों को देखती थी तो ठान लिया कि मैं भी वेट लिफ्टिंग में उपलब्धि हासिल कर अपने माता-पिता और शहर का नाम रोशन करूंगी। पापा ओमप्रकाश वर्मा टायर रिसोलिंग (पुराने टायरों पर रबड़ चढ़ाने) का काम करते हैं। चार-भाई बहनों के पालन-पोषण और परिवार के खर्च की जिम्मेदारी उनपर हैं। परिवार की आर्थिक हालत सही नहीं होने पर पहले तो परिजनों ने खेलों में जाने से इंकार कर दिया। वेट लिफ्टिंग कोच बेताब सिंह मान को जब पता चला तो उन्होंने परिजनों से बात की और निशुल्क ट्रेनिंग देने के लिए आश्वस्त किया। 53 किलो भार वर्ग के साथ वेट लिफ्टिंग की शुरूआत की। बड़ी बहन की शादी के बाद दो भाइयों में से एक मुझे आगे बढ़ाने के लिए पापा के काम में हाथ बंटाने लगा और दूसरा मुनीमी का काम करने लगा। किसी ने प्रोटीन का खर्च उठाया तो किसी ने प्रतियोगिता में आने-जाने के लिए किराए का। कोच बेताब सिंह के मार्गदर्शन में दो बार स्टेट में गोल्ड मैडल हासिल करने के बाद विशाखापट्टनम में नेशनल प्रतियोगिता में खेलने के लिए गई लेकिन प्रेक्टिस नहीं होने के कारण उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई। इसके बाद भी हौंसला नहीं डगमगाया और बीपीएड की तैयारी के साथ ही वेट लिफ्टिंग के लिए रोजाना सुबह-शाम चार-चार घंटे प्रेक्टिस करती रही। इसीका नतीजा है कि स्टेट बेस्ट लिफ्टर का खिताब हासिल किया। अब फरवरी में होने वाली नेशनल प्रतियोगिता की तैयारी करूंगी और उम्दा प्रदर्शन कर उपलब्धि हासिल करूंगी।” (जैसा कि आरती वर्मा ने भास्कर को भेजी संघर्ष की कहानी में बताया)

पिता बोले- मैं तो उसे खेलने से ही मना करता था और उसी ने मेरा नाम रोशन कर दिया

बेटियां अगर ठान ले तो कोई भी लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं हैं। आरती को पहले मना करता था लेकिन उसकी जिद्द ने ऐसा कर दिखाया कि जिससे परिवार ही नहीं जिले का नाम रोशन हुआ है। एक पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या होगी कि संघर्ष के बूते बेटी ने स्टेट प्रतियोगिता में गोल्ड मैडल के साथ अवार्ड हासिल किया।

कोच – जिले के 8 खिलाड़ियों का दमदार रहा प्रदर्शन, सुविधाएं मिलें तो और सुधरे स्थिति

वेट लिफ्टिंग कोच का बेताब सिंह मान का कहना है कि वेट लिफ्टिंग स्टेट प्रतियोगिता में आरती वर्मा का स्टेट बेस्ट लिफ्टर का खिताब हासिल करना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है। जिले से महिला वर्ग में पांच और पुरूष वर्ग में आठ खिलाड़ियों का प्रदर्शन दमदार रहा। पर्याप्त संसाधन मिले तो वेट लिफ्टिंग में खिलाड़ी नेशनल स्तर पर जिले को ऊंचाईयों पर ले जा सकते हैं।

Input : Dainik Bhaskar

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