माता का एकलौता मंदिर, जहां दसों महाविद्या हैं विराजित

Maa Kamakhya Temple, Guwahati

पुराणों में आने 10 महाविद्यओं के बारे में पढ़ा होगा। दस महाविद्या से अर्थ है मां की दस शक्तियों का। मां ने इन्हीं शक्तियों से दैत्यों का वध किया है। दस महाविद्याएं है मां काली, मां तारा, मां त्रिपुरसुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला। आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां दसों महाविद्या एक साथ विराजित है।

Maa Kamakhya Temple, Guwahati

गुवाहाटी का कामाख्या शक्तिपीठ दुनिया का एकलौता ऐसा शक्तिपीठ है जहां मां दस महाविद्यों और 64 योगिनियों के साथ विराजमान हैं। कामाख्या शक्तिपीठ गुवाहाटी (असम) के पश्चिम में 8 किलोमीटक दूर नीलांचल पर्वत पर है। देवी पुराण के अनुसार माता सती ने अपने पिता दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था। दक्षप्रजापति ने भगवान विष्णु, ब्रह्मा सबको न्यौता दिया था लेकिन भोलेनाथ को इसमें नहीं आमंत्रित किया था।

माता सति अपने पिता को समझाने के लिए उनके आयोजन में गयी थी लेकिन जब भरी सभा में सबके सामने दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया तो मां ने क्रोध में आकर यज्ञ कुंड में आत्मदाह कर दिया था। जिसके बाद भगवान शिव ने माता के जले हुए शरीर को लेकर तांडव करना शुरू किया था।

भोलेनाथ की माता सति के शरीर के प्रति इतनी आसक्ति देख भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र चला कर सती के देह के टुकड़े-टुकड़े कर दिया । जहां-जहां माता के शरीर का अंग गिरा वो स्थान शक्तिपीठ कहलाया। कामाख्या शक्तिपीठ पर माता सति का योनि भाग गिरा था। आपको बता दें इस मंदिर में मां की मूर्ति नहीं है। यहां मां के योनि भाग की ही पूजा की जाती है। मंदिर में एक कुंड सा है जो हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। यह शक्तिपीठ माता के सभी पीठों में महापीठ माना जाता है।

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