बिहार में इन दिनों काल बैसाखी के हालात बने हुए हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक बिहार-झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं। तापमान बढऩे से उत्तर-पूर्वी बिहार के कुछ इलाकों में दो-तीन घंटे के भीतर अचानक तेज आंधी-पानी एवं ओलावृष्टि के हालात बन सकते हैं।

मौसम विभाग की ओर से शनिवार को जारी पांच दिनों के पूर्वानुमान के मुताबिक गंगा के तटवर्ती हिस्से एवं हिमालय के तराई इलाके में तेज आंधी के साथ-साथ बिजली कड़क सकती है। ओलावृष्टि की भी संभावना है। कुछ इलाकों में बादल गरजने के साथ-साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वोत्तर बिहार के कई इलाके अप्रैल एवं मई महीने में मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो जाते हैं। इस दौरान समुद्र की ओर से चलने वाली हवाएं स्थल की गर्म हवाओं से टकराकर खतरनाक रूप ले लेती हैं। विभिन्न राज्यों में इसका अलग-अलग नाम है। पूर्वोत्तर में ऐसी स्थिति को नार्वेस्टर कहते हैं, जबकि इससे होने वाली व्यापक तबाही को देखते हुए बिहार-झारखंड एवं पश्चिम बंगाल में काल बैसाखी कहा जाता है।

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पिछले 30 मार्च एवं सात अप्रैल को बिहार को ऐसी ही स्थितियों का सामना करना पड़ा था, जिनमें दर्जनों लोगों की जानें गई थीं। फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा था। कई घर तबाह हो गए थे। मौसम विभाग के पटना स्थित कार्यालय ने आठ अप्रैल के लिए भी अलर्ट जारी किया था, जो शांति से गुजर गया। विभाग के मुताबिक स्थितियां अभी बनी हुई हैं। दो-चार घंटे के दौरान किसी भी इलाके में काल बैसाखी की स्थिति बन सकती है।

10 तक मांगी नुकसान की रिपोर्ट

कृषि विभाग ने आंधी-पानी से हुए फसलों के नुकसान की भरपाई में जुटा है। कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने सभी प्रभावित जिलों के कृषि पदाधिकारियों को क्षति के आकलन का निर्देश दे दिया है। मंगलवार तक रिपोर्ट मांगी गई है, जिसे संबंधित जिलों के डीएम के जरिए आपदा प्रबंधन विभाग के पास भेजा जाएगा। फसलों की क्षति की भरपाई की जाएगी।

Input : Dainik Jagran

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