बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के छात्रों की तरह उन शिक्षकों का भविष्य भी गर्त में जाता दिख रहा है, जो बीएड की डिग्री पाकर अपनी नौकरी बचाना चाहते हैं, प्रमोशन चाहते हैं। दूरस्थ शिक्षा से बीएड करने वाले ऐसे छात्रों का डेढ़ साल बाद परीक्षा तो दूर फार्म भी नहीं भरा जा सका है। अगर 2019 तक इन्हें बीएड की डिग्री नहीं मिल पाई तो इनकी नौकरी भी जाएगी। ये शिक्षक विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत हैं। एनएसयूआइ के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष आसीफ इकबाल के नेतृत्व में गुरुवार को बीएड छात्रों का हुजूम विश्वविद्यालय पहुंचा। वहां से ये लोग दूरस्थ शिक्षा भी गए मगर कहीं कोई अधिकारी नहीं मिल पाए। कुलपति व कुलसचिव से मोबाइल पर भी बात नहीं हो पाई। वहीं दूरस्थ शिक्षा के निदेशक डॉ. अशोक कुमार श्रीवास्तव ने फोन उठाया भी तो यह कहकर बात खत्म कर दी कि बिना मान्यता के ही एडमिशन लिया गया था तो परीक्षा रुकनी ही थी। हां, अब मगर कोई न कोई रास्ता निकालने का हम सब प्रयास कर भी रहे हैं। इसमें विलंब लग रहा है। इधर, अधिकारियों के नहीं मिलने और निदेशक के आश्वासन की घुटी पीक सभी शिक्षक बैरंग लौट गए। आसीफ इकबाल ने कहा कि नामाकन के एक वर्ष बाद मान्यता नहीं होने का तर्क क्या उन छात्रों के साथ धोखा नहीं है? उन्होंने कहा कि अब छात्रों का धैर्य जवाब दे रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन यूं ही टालमटोल करता रहा तो आर-पार की लड़ाई के लिए हम सब विवश होंगे। यूनिवर्सटी में तालाबंदी करेंगे और सीधे राजभवन मार्च होगा। इस मौके पर दिलीप कुमार शर्मा, विवेक कुमार, मनीष कुमार, रविराज, संजय पंडित, ललन कुमार, गोविंद कुमार, अब्दुल, मनीष राय, राकेश कुमार आदि उपस्थित थे।

Input : Dainik Jagran

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