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अविश्वास प्रस्ताव से पहले PM मोदी बोले- लोकतंत्र के लिए अहम दिन, देश हमें देख रहा…!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज संसद में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा। एनडीए के पास संख्याबल है इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों इस मौके को अगामी 2019 लोकसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए भुनाने की कोशिश करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में नंबर गेम में कमजोर विपक्ष मोदी सरकार को शब्‍दों के तीर से घायल करने की पूरी कोशिश करेगा। पीएम मोदी को भी इस बात का आभास है, इसलिए उन्‍होंने ट्वीट कर सांसदों से सकारात्मक भूमिका की उम्मीद की है। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं की संसद के मानसून सत्र का तीसरा दिन भी हंगामे के बीच गुजरेगा।

पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारे संसदीय लोकतंत्र के लिए आज बेहद महत्‍वपूर्ण दिन है। मुझे यकीन है कि मेरे साथी सांसद इस अवसर पर आगे आएंगे और एक सकारात्मक, व्यापक और बिना किसी व्यवधान के बहस सुनिश्चित करेंगे। हम लोगों और हमारे संविधान के निर्माताओं को इसका श्रेय देते हैं। पूरा भारत आज हमें नजदीक से देख रहा होगा।’

आज इस पर चर्चा होगी और प्रधानमंत्री सदन में अपना पक्ष रखेंगे। इसके साथ इस प्रस्‍ताव पर वोटिंग भी होगी। संसद में मानसून सत्र के पहले दिन मोदी सरकार के खिलाफ टीडीपी की ओर से लाया गया था। अविश्‍वास प्रस्‍ताव स्‍वीकार किए जाने के बाद दस दिन के भीतर उसे सदन में बहस के लिए लाया जाता है। सरकार से विचार करने के बाद अध्‍यक्ष फैसला करता है कि प्रस्‍ताव पर चर्चा किस दिन हो। यदि सरकार चाहे तो चर्चा उसी दिन आरंभ की जा सकती है।

दरअसल, विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव अब मोदी सरकार के लिए केवल जीत का सवाल नहीं है, बल्कि इतनी बड़ी जीत का है कि विपक्ष नैतिक तौर पर हार मानने को मजबूर हो। हालांकि अभी भी कुछ दलों ने पत्ते नहीं खोले हैं और किसी के पक्ष में वोट देने या इससे दूर रहने का फैसला आखिरी वक्त पर लेंगे। बीजद, अन्नाद्रमुक, टीआरएस की ओर से भी कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन भाजपा दो तिहाई बहुमत की रणनीति पर काम कर रही है। गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में इसका खाका तैयार हुआ और पार्टी के विभिन्न नेता अलग अलग दलों से बात कर यह सुनिश्चित करने में लगे रहे कि राजग से बाहर खड़े दल भी वोटिंग के वक्त सरकार के साथ रहें।

सरकार बचाने के लिए महज 268 सांसद चाहिए
545 सदस्यों वाली लोकसभा में मौजूदा समय में 535 सांसद हैं। ऐसे भाजपा को बहुमत हासिल करने के लिए महज 268 सांसद चाहिए होंगे। भाजपा के अभी 273 सदस्य हैं, इसके अलावा भाजपा के सहयोगी दलों शिवसेना के 18, एलजेपी के 6, अकाली दल के 4 और अन्य के 9 सदस्य हैं। इस तरह से सदन में कुल संख्या 310 पहुंच रही है। ऐसे में यह उम्‍मीद की जा रही है कि भाजपा को अविश्वास प्रस्ताव को गिराने और सरकार को बचाने में कोई दिक्कत नहीं होने वाली।

Input Dainik Jagran

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