बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्रों की छपाई में मनमानी का मामला विजिलेंस जांच के लिए सौंपा जा सकता है। विवि की तमाम परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र छापने वाली कोलकाता की एजेंसी को मनमाने तरीके से यह काम सौंपा गया है। उससे कोई लिखित करार नहीं हुआ है। इस प्रकार कानूनी प्रावधान की अवहेलना की गई। नतीजा सामने है। एजेंसी व विवि में भुगतान का पेच फंस गया और इसमें लाखों विद्यार्थियों का भविष्य फंस गया है। यूजी से पीजी तक की परीक्षाएं प्रश्नपत्रों के अभाव में नहीं हो रही हैं। कहा जा रहा है कि 39 परीक्षाएं इसी के चलते लंबित हैं। ये मामला राजभवन पहुंचने के बाद जांच की सरगर्मी तेज हो गई है। मंगलवार को यह बात सामने आई कि कुलाधिपति ने इसकी जांच निगरानी से कराने की मंशा जाहिर कर दी है। पैसे के लेनदेन के चलते ही प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी ने काम रोक दिया है। उसने 58 लाख का बिल थमाया है। प्रश्नपत्र नहीं देने के कारण ही टीडीसी पार्ट वन, पार्ट टू, पीजी सेमेस्टर वन, टू, फोर, बीएड सेकेंड ईयर, एमएड सेकेंड ईयर के साथ वोकेशनल कोर्स-2017 के तहत बीबीए-बीसीए आदि की परीक्षाएं रुकी हुई हैं। इनमें कुछ के फॉर्म भी भरे जा चुके हैं, लेकिन परीक्षाओं का कोई ठिकाना नहीं है।

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कुलपति की मनपसंद होती है एजेंसी

कोलकाता की एक एजेंसी को बिना किसी आदेश या टेंडर के गुपचुप तरीके से प्रश्नपत्र छापने का काम दे दिया गया। लिहाजा, कंपनी को जब उसके काम के पैसे नहीं मिल पाए तो उसने प्रश्नपत्र देने से इन्कार कर दिया है। कुलपति रह चुके पंडित पलांडे ने अपने कार्यकाल में हैदराबाद की एजेंसी से प्रश्नपत्र छपाई का काम लिया। मौजूदा कुलपति ने उसको हटाकर कोलकाता एजेंसी को यह जिम्मा सौंप दिया। लेकिन, इसका कोई लिखित आदेश नहीं निकला और न टेंडर प्रक्रिया ही अपनाई गई। मौखिक आदेश पर एजेंसी ने कुछ परीक्षाओं के प्रश्नपत्र दिए, लेकिन आगे के लिए बिना पैसे काम करने से हाथ खींच लिया। अब हाहाकार मचा हुआ है।

कुलाधिपति ने छात्रसंघ अध्यक्ष से जाना विवि का हाल

पिछले दिनों बीआरएबीयू छात्रसंघ के अध्यक्ष बसंत कुमार को राजभवन से बुलावा आया था। कुलाधिपति सह राज्यपाल छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्षों से मिलकर विश्वविद्यालयों की समस्या और उनके समाधान पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। छात्रहित में जरूरी कदमों के लिए भी उनके विचार जान रहे हैं। बसंत ने कुलाधिपति को बताया कि एजेंसी ने पैसे के लिए प्रश्नपत्र रोक रखा है। इसपर कुलाधिपति ने कहा कि ऐसा है तो इसकी जांच निगरानी से कराई जाएगी। जितनी परीक्षाएं लंबित हैं उसका सही-सही पता लगाकर एक फार्मेट में भेजिए। बीआरएबीयू में कौन-कौन सी परीक्षाएं रेगुलेशन व आर्डिनेंस के लिए रुकी हुई हैं इसका भी ब्योरा भेजने को कहा है। विवि अध्यक्ष ने कहा कि इसी कड़ी में 19 मई को छात्रसंघ की कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है। दामुचक मोहल्ले के रहने वाले अशोक कुमार चौधरी नामक एक व्यक्ति ने भी राजभवन, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, निगरानी तक को पत्र लिखा है।

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टीआर एवं अंकपत्र की छपाई का विवाद भी सुर्खियों में

टीआर एवं अंकपत्र की छपाई का विवाद भी सुर्खियों में है। 2017 के टीडीसी पार्ट वन, टू व थ्री का टीआर एवं अंकपत्र छापने का आदेश उस एजेंसी को नहीं है। विवि प्रशासन का कहना है कि एक गलत नोटशीट का हवाला देकर एजेंसी दबाव बना रही थी। पर्चेज एंड सेल कमेटी ने पहले ही फ्रेश टेंडर के जरिए 2017 का टीआर व अंकपत्र छापने का आदेश जारी कर रखा है।

Input : Dainik Jagran

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