पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट इलाके मे तृणमूल कांग्रेस के कब्जे वाली बरशल ग्राम पंचायत के उप प्रमुख बहादुर शेख की सोमवार शाम को हत्या हो गई जिसके बाद भड़की हिंसा व आगजनी ने एक बड़ी घटना का रूप ले लिया हैं। टीएमसी नेता बहादुर शेख की हत्या से गुस्साए टीएमसी पार्टी के समर्थको ने घटना के कुछ घंटे बाद हीं 10-12 घरों में आग लगा दी, जिसमें 10 लोगों की जलकर दर्दनाक तरीके मौत हो गई । बंगाल पुलिस ने मौके से कई सारे शव बरामद किए हैं। इस हिंसक घटना से व्यापक तनाव का माहौल हो गया हैं।

वहीं, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में हुई हिंसक घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यह घटना दर्शाती हैं कि बंगाल मे आतंक और अराजकता की संस्कृति हैं। और उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव हरिकृष्ण द्विवेदी से घटना पर ताजी जानकारी मांगी हैं । राज्यपाल ने ट्वीट कर कहा-‘रामपुरहाट में हुई बर्बरता देखकर काफी दुखी व चिंतित हूँ।

डीजीपी बोले 

वहीं रामपुरहाट की इस हिंसक घटना पर पश्चिम बंगाल के डीजीपी मनोज मालवीय का कहना हैं कि तृणमूल काँग्रेस के उप प्रधान बहादुर शेख की कल रात मे हत्या की ख़बर आई थी जिसके एक घंटे बाद देखा गया कि पास के कई घरों में आग लग गई हैं। इस मामले मे 11 लोगो को गिरफ़्तार किया गया है। और वहाँ के SDPO और रामपुरहाट के IC को हटा दिया गया हैं। इस मामले पर एक स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम का भी गठन किया किया गया हैं।

भाजपा ने घटना की निंदा की 

बंगाल मे मुख्य विपक्षी बीजेपी ने इस हिंसक घटना की कड़ी निंदा की हैं और सत्तारूढ़ टीएमसी को आड़े हाथों लिया हैं। बंगाल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि, इस हिंसक घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बंगाल में कानून का शासन नहीं बल्कि शासक का कानून हैं। तृणमूल काँग्रेस के गुंडों को अब कानून व शासन-प्रशासन का कोई डर नहीं है इसीलिए इस प्रकार की बर्बर घटना राज्य में हो रही हैं। साथ हीं उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल राष्ट्रपति शासन की तरफ बढ़ रहा हैं।

एसआइटी का हुआ गठन

इस हिंसक घटना के बाद जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआइटी गठन कर दिया हैं। राज्य पुलिस के एडीजी (कानून व्यवस्था) ज्ञानवंत सिंह के नेतृत्व मे 3 सदस्यीय एसआइटी का गठन किया गया हैं, जो इस पूरे मामले की जाँच कर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौपेगी।

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